13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक दिन सब होही ‘राखÓ

'राखबे त राख। नइ राखस ते झन राख। कतको राखे के कोसिस करिन, नइ राखे सकिन।

2 min read
Google source verification
CG News

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनकवि संत पवन दीवान ह जीवन ल छत्तीसगढ़ महतारी के सेवा म अरपित करइया अइसे सपूत कहाथे जेन ल जन-जन ह मान देथे। कोनो वोला करू-करू भले करिस, फेर वोहा कोनो ल कड़ुवा भाखा म नइ बोलिस।

संत पवन दीवान ह डॉ. खूबचंद बघेल के गांव पथरी से रिस्ता म बंधाय रहिस। उंकर महतारी के ममागांव ये पथरी ह। संत बालकदास ह पथरी के लइका ए। संत पवन दीवान के पीठ म चघके लइकापन म संत बालकदास ह तरिया म तौरे हे। डॉ. खूबचंद बघेल के भातरी संघ के अव्वल कवि पवन दीवान ह छत्तीसगढ़ के भाव अउ परभाव ल लेके बड़े से बड़े मैदान म ललकारिस अउ जीतिस।
स्यामाचरन बघेल के नेतृत्व म मनवा कुरमी समाज के महाअधिवेसन म गोढ़ी गांव म एक परस्ताव पास होय रहिस। ये पहिला परस्ताव रहिस जेमा माता कौसिल्या बर पूरा समाज ह एकजुट होके मंदिर के परस्ताव पास करिस। सरकार ह माता कौसिल्या सोध पीठ बनइस। दीवानजी ह ये सब घटना अउ परस्ताव ल जानके गद्गद् हो गे रहिस। परवचन, सामाजिक बइठ सबे मौका म दीवानजी ह माता कौसिल्या अउ छत्तीसगढ़ के भांचा रामजी के कथा बताय म गमन हो जाय।
ऐहा संजोग ये कि छत्तीसगढ़ी कुरमी समाज के अधिवेसन म इक्कीस फरवरी 2016 के दीवानजी ह माता उप्पर कविता पढि़स अउ कुरमी समाज के योगदान बर जीभर के असीस दीस।
दू बछर म संत पवन दीवान ह चालीसझन के सम्मान करिस अउ सबला माता कौसिल्या सम्मान देके असीस दे रहिस। वोकर ये बात ह सबला बहुत सुहावय के भारत देस ल भारत माता कहे जाथे, वोकर संग छत्तीसगढ़ ह महतारी कहाथे। 'जय-जय छत्तीसगढ़ महतारीÓ उंकर बहुत परसिद्ध कविता हे। वोइसने समता अउ एकता के धरती छत्तीसगढ़ बर उंकर कविता हे।
तोर धरती, तोर माटी रे भइया,
तोर धरती, तोर माटी।
धरती बर तो सबो बरोबर,
का हाथी, का चांटी रे भइया,
तोर धरती, तोर माटी।
दीवानजी साहित्यकारमन के संगी रहिस। जीवनभर छत्तीसगढ़ के जस गाए के उदिम करिन। धरम, परवचन, राजनीति, कविता चारोंमुड़ा भन्नाटी ***** विचार के चरखी चलइस। राजनीति म उंकर जवई ह बहुतझन ल बने नइ लागिस। दीवानजी काहय के छत्तीसगढ़ के सेवा करे बर जउन मौका जिहां ले मिलिस, मेहा नइ छोड़ सकेंव।
पवन दीवान ह माता बर लिखे हे-
तेंहा सब ला सब दे हस।
हम मन ला बटोरे हन।
तोला हम कुछू नइ लहुटा पायेन।
तोर मन ला घेर-बेर टोरे हन।
पवन दीवान ह अपन कविता राख म राख महिमा बतावय। ये कविता ह सबले जादा सुने गीस।
'राखबे त राख।
नइ राखस ते झन राख।
कतको राखे के कोसिस करिन, नइ राखे सकिन।
मैं बतावत हंव तेन बात ल, धियान म राख।
तहूं होबे राख।
महूं होहूं राख।
सब होही राख।
तेकरे सेती भगवान संकर हा,
चुपर लेहे राख।Ó