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धान के कटोरा में धान के बीज को बेचने फर्जी दस्तावेज से लिया लाइसेंस, अधिकारियों ने कहा- गंभीर विषय नहीं..

बायोस्टैड इंडिया लिमिडेट और उसकी सहयोगी कंपनी नंदी सीड्स द्वारा फर्जी शपथ पत्र और..

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CG News

जितेन्द्र दहिया@रायपुर. कृषि विभाग का निजी बीज कंपनियों को फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी कर व्यापार करने की छूट दी गई है। कंपनियां बीते 4 वर्षों से किसानों को घटिया बीज बेच रही हैं। पत्रिका को मिले दस्तावेज बताते हैं कि बायोस्टैड इंडिया लिमिडेट और उसकी सहयोगी कंपनी नंदी सीड्स द्वारा फर्जी शपथ पत्र और ट्रायल के नाम पर फर्जी चेक की फोटो कॉपी कृषि विभाग में जमा करके लाइसेंस हथिया लिया गया है। इस मामले में विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को नुकसान नहीं हुआ इसलिए गंभीर विषय नहीं है। धान,मक्का,सब्जियां व सरसों के बीज हैं।

यह है नियम
नियमानुसार प्रदेश में बेची जाने वली कंपनियों के बीजों की किस्म का ट्रायल कृषि विश्वविद्यालय से होना अनिवार्य है। क्योंकि किसी भी बीज के लिए प्रदेश की जलवायु उचित है या नहीं इसका निर्धारण ट्रायल बेस पर ही हो सकता है लेकिन कंपनी द्वारा किसानों को बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश में कृषि दुकानों से बीजों के सैंपल लेकर गुणवत्ता जांचने विभाग के लैब भेजा जाता है। इसमें बीते वर्षों में गुणवत्ता जांच में कई कंपनियों के नमूने फेल हो चुके हैं। कंपनियों ने कुछ किस्मों का लाइसेंस प्रदेश में लिया है लेकिन उनके अलावा दर्जनों किस्मों को बेच रही है। इसके अलावा कंपनियां बीजों का आउटसोर्सिंग करके पैकिजिंग करने का काम कर रही है।

एेसे किया खेल
निजी कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनी ने रायपुर की एक ट्रेडिंग कंपनी के माध्यम से प्रदेश भर में व्यापार कर रही है। उस टे्रडिंग कंपनी के संचालक ने कृषि विभाग में ट्रेडिंग के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। संचालक ने एफीडेविट दिया कि कृषि विश्वविद्यालय में धान और मक्का की किस्मों के ट्रायल के लिए आवेदन दिया है। जिसके लिए ८ लाख रुपए जमा किया गया है और एचडीएफसी बैंक का चेक की फोटोकॉपी भी जमा की थी। यह सिलसिला दो साल तक चला। विभाग ने बिना जांच किए कंपनी को लाइसेंस जारी कर दिया। जब इस संबंध में कृषि विश्व विद्यालय से आरटीआई से पता चला कि कंपनी ने बीते चार साल में किभी भी किस्म का ट्रायल नहीं करवाया।

बिक्री शुरू करने से पहले होनी चाहिए जांच
जिस बीज की बिक्री करनी है पहले उनका ट्रायल कराना अनिवार्य होता है। विभाग के अंतर्गत फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर बीज की दुकान में पहुंचकर प्रदेश में बीज बेचने वाली कंपनियों के लाइसेंस व समयावधि की जांच करते हैं। बीज के लिए जारी लाइसेंस का प्रत्येक तीन वर्ष में नवीनीकरण कराना होता है।

बिना मापदंड पूरा किए दे दिया लाइसेंस
जानकारी के अनुसार कई कृषि दुकानों में एक लाइसेंस लेकर खाद, बीज व दवाई बेचा जा रहा है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित दुकानों में नियमों को ताक पर रखकर बीजों को खपाया जा रहा है। जहां विभाग के संबंधित अधिकारियों की निष्क्रियता से किसान ठगे जा रहे हैं। कड़ी मेहनत व लागत लगाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नही मिलने पर संबंधित दुकानदार हाथ खड़े कर देते हैं। अहम बात यह है कि बिना पूरे मापदंड के कंपनियों को व्यापार करने की छूट दी जाती है।

किसानों के साथ राजस्व का भी नुकसान
बीजों के ट्रायल के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए हाईब्रिड धान और 60 हजार मक्का बीज के प्रति किस्म के लिए कृषि विद्यालय में कंपनी को जमा करना पड़ता है। जिससे यहां के विशेषज्ञ दो साल तक इसकी जांच अलग-अलग सीजन और राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में ट्रालय वहां की जलवायु के आधार पर लेते हैं। अच्छा परिणाम मिलने के बाद ही बीजों के विक्रय की अनुमति राज्य में मिलती। इसके अलावा बीज किस्म का इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिर्सर्च आईसीआर के गजट में नोटीफिकेशन होना चाहिए। ट्रायल की राशि बचाने के लिए यह खेल कंपनियां खेल रही हैं।

बीजों की बिक्री के संबंध में शिकायत मिली थी। जांच का आदेश उप संचालक को दिया गया है। उन्होंने रिपोर्ट बना ली है। अभी तक मैंने रिपोर्ट देखी नहीं है देख कर बताता हूं। यदि कंपनी ने गड़बड़ी की है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गयाराम, संयुक्त संचालक कृषि

शिकायत मिलने के बाद मैने जांच की है। रिपोर्ट डायरेक्टेड कार्यालय भेज दी गई है। कुछ खामियां मिली हैं।
राजेश परगनिहा, उप संचालक, कृषि विभाग