
छत्तीसगढ़ी को बनाएं शिक्षा का माध्यम
Raipur News : शिक्षक हमें छत्तीसगढ़ी में पढ़ाया करते थे। इसलिए छत्तीसगढ़ी हमारे व्यवहार में रची-बसी है। हम भले हिंदी माध्यम से पढ़े लेकिन हमारा माहौल छत्तीसगढ़ी रहा। इसलिए आज लिख-पढ़ पा रहे हैं। सरकार को भी यह सोचने की जरूरत है कि जब तक छत्तीसगढ़ी को शिक्षा का माध्यम नहीं बनाया जाएगा, तब तक इसका उद्धार संभव नहीं है। (cg news hindi) यह कहा, छत्तीसगढ़ी के जानकार संजीव तिवारी ने। वे न्यू सर्किट हाउस के कन्वेंशन हॉल में आयोजित आखर छत्तीसगढ़ में बोल रहे थे। छत्तीसगढ़ी अउ डिजीटल मीडिया पर पैनल डिस्कशन में सूत्रधार थे, जबकि सतीश जैन, नवीन देवांगन, रेणुका सिंह और मिनेंद्र चंद्राकर पैनलिस्ट रहे।
तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ी को लेकर वेबसाइट बनाने से कुछ नहीं होगा, यह सिर्फ पीएचडी स्टूडेंट़्स के लिए काम आएगी। (raipur news hindi) हमें देखने की जरूरत है कि हम संस्कृति और अस्मिता के लिए क्या कर सकते हैं।
राम भजन और पंडवानी की प्रस्तुति
कार्यक्रम में रामनामी समुदाय द्वारा राम भजन की प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने पाम्परिक वाद्ययंत्र एवं गीत मोहारी बाजा तथा बांस गीत की प्रस्तुति दी। इस दौरान पद्मश्रीभारती बंधु, पद्मश्री मदन चौहान, पद्मश्री उषा बारले एवं संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित काशीराम साहू ,परदेशी राम वर्मा, रामेश्वर वैष्णव, मीर अली मीर, अरुण कुमार निगम, चितरंजन कर, राहुल सिंह समेत कई नामी कलाकार मौजूद रहे। (cg raipur news) पण्डवानी गायक चेतन देवांगन की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से आसान हुआ प्रमोशन
फिल्म डायरेक्टर सतीश जैन ने कहा, एक जमाने में हमें फिल्म के प्रमोशन को लेकर दिक्कत हुआ करती थी। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हम आसानी से कंटेंट लोगों तक उपलब्ध करा देते हैं। पैनल के एक सवाल पर कहा कि हम पीरियड फिल्म इसलिए नहीं बनाते क्योंकि हमारा बजट कम होता है। हमारी फिल्मों का बाजार छोटा है। (chhattisgarh news) कई बार हमें रिकवरी में पसीने छूट जाते हैं। बॉयोग्राफी बनाने के लिए कॉस्ट्यूम, लोकेशन और सेट की कमी है। पुराने गांव खत्म हो रहे हैं। एक झोपड़ी तक नहीं मिलती। इसलिए हमारी फिल्में हल्के-फुल्के सब्जेक्ट पर बनती हैं।
Published on:
12 Jun 2023 11:28 am
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