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मदकू द्धीप में इतिहास के कई रहस्य दबे

- मंडूक उपनिषद की भी रचना यहीं हुई- पर्यटन और पुरातत्व के लिहाज से बेहद अहम है यह स्थान

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Many secrets of history buried in Madkudweep

Many secrets of history buried in Madkudweep

दिनेश यदु@रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी से 90 किमी दूर मुंगेली जिले का मदकू द्धीप (Madku dweep) पुरातात्विक व पर्यटन (archaeological and tourism) के दृष्टिकोण से बेहद अहम है। मदकू द्धीप चारो तरफ से जंगल से घिरे होने के साथ ही शिवनाथ नदी (Shivnath River) की धारा के कारण दो भागों में बंटा हुआ है। लोगों ने इसका नाम बड़ा व छोटा द्धीप रख दिया है। द्धीप में कई प्रकार के औषधीय पेड़-पौधे हैं, जिनसे कई लाइलाज बीमारियों के इलाज का दावा किया जाता है। मदकू द्धीप में अवशेष मिले हैं।
मुण्डकोपनिषद की रचना
मदकू द्धीप को माण्डूक्य ऋषि (mandukya sage) की तपोभूमि माना जाता है। संत रामरूप दास त्यागी ने बताया, हमारे देश की एक पहचान के रूप में रुपए, पैसे या शासकीय चीजों में सत्यमेव जयते लिखा रहता है, इस शब्द का उल्लेख ऋषि मंडुक ने यहां मंडुकोपनिषद (Mandukopanishad)में की थी। इस महाकाव्य के पहले खंड का छठा मंत्र सत्यमेव जयते को संविधान (Constitution of Satyamev Jayate) में भी शामिल किया गया है।

2011 में हुई थी खुदाई
पुरातत्वविद पद्मश्री अरुण शर्मा (Archaeologist Padmashree Arun Sharma) ने बताया, मदकू द्धीप के बड़े हिस्से का पुरातत्व विभाग द्वारा 2011 में उत्खनन किया गया था, जिसमें गणेश की प्रतिमा के साथ शिव मंदिरों के प्राचीन अवशेष मिले हैं, जो 11वीं शताब्दी के समकालीन है। इन मेंदिरों में उमामहेश्वर, गरुड़ारूढ़ लक्ष्मीनारायण व 6 शिव मंदिर, 11 स्पार्तलिंग मिले हैं। खुदाई के बाद वहां बिखरे पत्थरों को मिलाकर मंदिरों का रूप दिया गया। यहां प्राप्त शिलालेखों के अनुसार 11वीं शताब्दी में यहां के मंदिर उच्चतम स्थिति में थे।

IMAGE CREDIT: Dinesh Yadu @ Patrika Raipur

द्धीप में औषधीय पौधों का भंडार
मदकू द्धीप में पुरातत्व के अलावा कई ऐसे पेड़पौधे हैं, जिससे कई जटिल रोग ठीक हो जाते हैं। वरुण का पेड़ है, जिससे थाइराइड के मरीजों के लिए लाभकारी है। ग्रामीण बताते हैं कि इस पेड़ की खास बात यह है कि इसमें साल के आठ माह तक इसमें ना तो पत्ते रहते है, ना ही किसी तरह के फूल, लेकिन गर्मी के समय इसमे फूल व पत्ते आ जाते है। इसके साथ इंद्र जोक का पेड़ भी इस द्वीप में बड़ी संख्या में हैं।

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