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प्रवासी मजदूरों के पास नहीं है नियोजक प्रमाण पत्र, 30 रुपए देने के बाद ही होगा पंजीयन

डाटा एकत्र कर श्रमिकों का विभागीय पंजीयन के लिए च्वाइस सेंटरों में भेजा जाएगा। लेकिन यहा पर श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्रमिकों को रजिस्ट्रेशन के लिए स्वयं च्वाइस सेंटर जाना होगा और ३० रुपए शुल्क देने के बाद ही पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी।

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प्रवासी मजदूरों के पास नहीं है नियोजक प्रमाण पत्र, 30 रुपए देने के बाद ही होगा पंजीयन

प्रवासी मजदूरों के पास नहीं है नियोजक प्रमाण पत्र, 30 रुपए देने के बाद ही होगा पंजीयन

रायपुर. श्रम विभाग प्रवासी मजदूरों का डाटा एकत्रित कर रहा है। गत सप्ताह से रजिस्ट्रेशन फार्मेट के माध्यम से स्किल मैपिंग का काम भी शुरू किया गया है। फार्मेट में अब कौशल संबंधी कॉलम में भी श्रमिकों की कार्य कुशलता लिखना है। यह पूरा डाटा ब्लॉक स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारियों द्वारा तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में यह रेकॉर्ड सिर्फ ब्लॉक स्तर पर बने क्वारंटाइन सेंटरों से जुटाया जा रहा है।

डाटा एकत्र कर श्रमिकों का विभागीय पंजीयन के लिए च्वाइस सेंटरों में भेजा जाएगा। लेकिन यहा पर श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्रमिकों को रजिस्ट्रेशन के लिए स्वयं च्वाइस सेंटर जाना होगा और ३० रुपए शुल्क देने के बाद ही पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी। इसके लिए ब्लाक स्तर की सर्वे टीम द्वारा फार्म प्रवासी श्रमिकों के मोबाइल नंबर एंट्री कर रही है, जिसके माध्यम से श्रमिकों को रजिस्ट्रेशन की सूचना दी जाएगी। फिर श्रमिक संबंधित च्वाइस सेंटर जाकर अपना कार्ड निकाल पाएंगे।

रजिस्ट्रेशन में आएगी ये अड़चनें

प्रावासी मजदूरों के आवेदन के लिए श्रमिक का बैंक पासबुक, आधारकार्ड और नियोजक प्रमाण पत्र देना होता है। श्रमिक को एक्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के किसी भी नियोजक के पास ९० दिन तक काम करने पर ही नियोजक प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। जब प्रवासी श्रमिकों ने छत्तीसगढ़ में काम किया ही नहीं, तो तकनीकी रूप से रजिस्ट्रेशन संभव नहीं है। प्रवासी मजदूरों के लिए एक्ट में परिवर्तन करने के बाद ही पंजीयन करके कार्ड बनाया जा सकेगा।

गांव-गांव में ढूंढना होगा प्रवासी श्रमिकों को

स्किल मैपिंग का काम अभी प्रशासन सिर्फ क्वारंटाइन सेंटरों में ही करा है। जबकि हजारों श्रमिकों को पहले ही क्वारंटाइन सेंटरों से छोड़ा जा चुका है। अब इसके लिए गांव-गांव और शहरों में भी सर्वे की आवश्यकता पड़ेगी।

विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारी

श्रम विभाग: प्रवासी श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन के बाद विभाग द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।

स्किल मैपिंग: पंचायत विभाग, श्रम विभाग और कौशल उन्नयन विभाग

प्रशिक्षण देना: श्रम विभाग व कौशल उन्नयन विभाग

यह है प्रक्रिया

सबसे पहले जिला पंचायत, नगरीय निकाय और तहसील स्तर के अधिकारी शासन के द्वारा जारी किए गए फार्मेट को भरेंगे, जिसमें श्रमिक को बैंक पासबुक, आधारकार्ड और नियोजक प्रमाण पत्र देना होगा। इसके बाद च्वाइस सेंटर में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के लिए श्रमिक को स्वयं ही जाना होगा।

इन राज्यों में इतने मजदूर

जम्मू-कश्मीर में 24090 मजदूर, महाराष्ट्र में 18704, उत्तरप्रदेश में 13172, तेलंगाना में 12730, गुजरात में 8071, कर्नाटक में 3279, तमिलनाडु में 2963, मध्यप्रदेश में 2840, आंध्रप्रदेश में 2392, हरियाणा में 2008, दिल्ली में 1967, हिमाचल प्रदेश में 1665 श्रमिक फंसे थे। सबसे अधिक मजदूर जांजगीर-चांपा के 25340 श्रमिक देश के अन्य राज्यों में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने गए थे।

हेल्पलाइन में दर्ज हुए मजदूरों की संख्या

बलौदाबाजार जिले के 20444, मुंगेली के 8623, कबीरधाम के 7668, बिलासपुर के 7366, बेमेतरा के 6215, कोंडांगांव के 6182, राजनांदगांव के 5365, रायगढ़ के 2254, बीजापुर के 2000, रायपुर के 1557, दुर्ग के 1187, जशपुर के 1010, गरियाबंद के 723, बालोद के 642, महासमुंद के 626, बलरामपुर जिले के 546 श्रमिक दूसरे राज्यों में काम के सिलसिले में गए थे, और अब कोरोना की वजह से वहां फंस गए थे।

खाद्य विभाग में रजिस्टर्ड कुल प्रवासी श्रमिकों की संख्या- 33470