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वैराग्य और आध्यात्म छोड़कर सांसारिक जीवन में वापस लौटे मुदित मुनि, आचार्य श्री से मांगी माफी

गुजरात के जूनागढ़ आश्रम से लौटे मुनि मुदित सागर उर्फ हुकुमचंद जैन अब सांसारिक जीवन में लौट गए हैं

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वैराग्य और आध्यात्म छोड़कर सांसारिक जीवन में वापस लौटे मुदित मुनि, आचार्य श्री से मांगी माफी

रायपुर. गुजरात के जूनागढ़ आश्रम से लौटे मुनि मुदित सागर उर्फ हुकुमचंद जैन अब सांसारिक जीवन में लौट गए हैं। उनके खान-पान से लेकर पूरी दिनचर्या आम लोगों की तरह हो गई है। सोमवार को सामान्य खान-पान करके वे किसी काम के सिलसिले में बिलासपुर के लिए रवाना हो गए। घर में उनका बड़ा भाई अखिलेश जैन गुजरात गए हैं। एक भाई रौशन वो भी किसी काम से बाहर गए हैं। वैराग्य व आध्यात्म के जीवन को छोडकऱ सांसारिक जीवन में लौटने के लिए उन्होंने अपने गुरु महाराज से माफी मांगी।

उनकी मां कमला बाई का उनका मानना है कि अगर संयम के राह पर चलने का निर्णय लिया है, तो उसे निभाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मुनि मुदित ने आध्यात्म छोडकऱ सांसारिक जीवन में लौटने का फैसला लिया है। इस फैसले को लेकर समाज और परिवार में अलग-अलग चर्चा है। मुनि मुदित ने पुलिस को बयान देते समय यह कहा था कि उन्होंने सांसारिक जीवन जीने का निर्णय लिया है। परिवार उन्हें स्वीकार करे या नहीं? ये उनका फैसला है।

मुनि मुदित 23 जनवरी से गुजरात के जूनागढ़ आश्रम से बिना बताए चले गए थे। पुलिस उनकी कई जगह तलाश करते हुए रायपुर पहुंची थी। रायपुर में भी वे अपने घर में नहीं आए थे। बाद में पुलिस उन्हें उनके भाई की मदद लेकर मुनि तक पहुंची। गुजरात पुलिस उन्हें अपने साथ ले जा रहा थी, लेकिन बाद में गुमशुदा दस्तयाबी करने और मुनि मुदित के वापस गुजरात नहीं जाने के निर्णय के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इससे पहले उनका विस्तृत बयान लिया गया। इसमें उन्होंने वापस जाने से इनकार किया।

संयम लगता था बंधन जैसा
हुकुमचंद ने वर्ष 2007 में आचार्य सुनील सागर से दीक्षा लिया था। इसके बाद हुकुमचंद से मुनि मुदित सागर बन गए थे और उनके साथ संयमित जीवन जीने लगे। गुजरात के जूनागढ़ में गिरनार वंदना के लिए आचार्य सुनील महाराज के साथ गए थे। इसके बाद से उनके सानिध्य में ही रह रहे थे।

कुछ दिन पहले उन्हें सांसारिक जीवन के प्रति मोह जाग गया और संयम और वैराग्य का जीवन छोडकऱ सामान्य जीवन जीने लौटने का निर्णय लिया। इसके बाद 23 जनवरी को बिना सूचना दिए आश्रम से निकल गए थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि संयमित जीवन उन्हें बंधन जैसा महसूस हो रहा था। इस कारण उन्होंने इसे त्यागने का निर्णय लिया।

गलत कदम के लिए माफी मांगी
मुनि मुदित इस प्रकार जूनागढ़ के आश्रम को छोडऩा गलत मानते हैं। उन्होंने इस बात के लिए आचार्य सुनील महाराज से अपने इस कदम के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन, समाज या परिवार से किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है। यह मार्ग उन्होंने अपने मन से उठाया है।