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मंत्री राजेश मूणत के पहले छत्तीसगढ़ के ये महारथी भी रहे विवादों में, जानिए क्यों

पढ़िए क्यों छत्तीसगढ़ के मंत्री बार-बार विवादों में घिर जाते हैं..

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रायपुर . छत्तीसगढ़ के पीडब्लूडी मंत्री पढि़ए छत्तीसगढ़ के नेताओं के विवादित बयान..

प्रशिक्षु लड़कियों ने कहा था मंत्री अजय चंद्राकर की नजर है गंदी
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चंद्राकर भी महिलाओं से अश्लील हरकत को लेकर विवादों में रहे। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अफसरों के प्रशिक्षण के दौरान उनके बंगले पहुंचे 9 लड़कियां ने बताया था कि मंत्री गंदी नियत से नीचे से ऊपर तक घूरने के बाद कुछ लड़कियों से उन्होंने सीधे पूछा कि, तुम्हारी शादी हुई है या नहीं? मंत्री की निगाहें इतनी घटिया और गंदी थी कि लड़कियां यह सोचकर डर गई कि मंत्री के विभाग में कैसे काम कर पाएंगे? मंत्री लड़कियों के सामने ही अपने कर्मचारियों को गंदी और भद्दी गालियां भी दे रहे थे।

मंजीत कौर ने बताया, वह सुरक्षागत कारणों से उन लड़कियों के नामों का उल्लेख नहीं कर रही हैं, क्योंकि मामला मंत्री से जुड़ा है। कौर ने राखी थाने में मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पहुंची थीं, तब उन्हें यह कहते हुए बैरंग लौटा दिया गया था कि मामला मंत्री का है, इसलिए उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकती। इसके बाद मंजीत ने पुलिस अधीक्षक को यह कहते हुए पत्र लिखा था कि जब वे जान दे देगी, क्या तब रिपोर्ट दर्ज की जाएगी?

मंत्री केदार कश्यप के इस बयान से मचा था बवाल
स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने 2016 में लोक सूरज अभियान के दौरान जशपुर जिले में कहा कि लडकियां मेकअप में ज्यादा और पढ़ाई में कम ध्यान देती हैं। जिस दिन कश्यप ने यह बयान दिया उसी दिन 22 वर्षीय टीना डाबी को यूपीएससी का टॉपर घोषित किया गया।

नसबंदी कांड के बाद मंत्री अमर अग्रवाल दिखे थे हंसी मजाक के मूड में
चर्चित बिलासपुर नसबंदी कांड में 13 माताओं की मौत और 50 से अधिक बच्चों के अनाथ होने के घटना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया था। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री रहे अमर अग्रवाल अट्टहास करते हुए उनकी एक फोटो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद प्रदेश में मंत्री की जमकर आलोचना हुई थी। कांग्रेस और जोगी समर्थकों ने मंत्री पर गंभीर सवाल उठाते हुए पद से हटाने की मांग की थी। जिसके बाद प्रदेश के मुखिया डा. रमन सिंह ने अमर अग्रवाल को स्वास्थ्य मंत्री के पद से हटाकर नगरीय प्रशासन एवं वाणिज्य कर मंत्री बनाया गया।

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल महासमुंद में सरकारी जमीन पर रिसॉर्ट बनाने को लेकर विवादों में रहे। इस मामले की जांच राज्य के मुख्य सचिव ने की। जिसमें कहा गया कि यह सरकारी जमीन गलत तरीके से मंत्री के परिजनों ने खरीदी. यह जमीन स्थीनीय किसानों ने 2009 में नहर के निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग को दान में दी थी. इसके बाद जल संसाधन विभाग ने इस जमीन को वन विभाग को सौंप दिया था। जांच रिपोर्ट के बाद महासमुंद जिले के डीएम को इस जमीन की रजिस्ट्री शून्य करने के निर्देश दिए। उनकी दलील है कि यह जमीन उन्होंने कानूनी रूप से वास्तविक भूस्वामी से खरीदी है।