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यहां बसा है धरती का नागलोक, जहां एक साथ मिलेंगे सांपों की 70 से ज्यादा प्रजातियां, हर तरफ मंडराता है मौत का खतरा

Nag panchami: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में एक ऐसी जगह है जिसे नागलोक (Naglok) के नाम से जाना जाता है। यहां के जशपुर जिले को नागलोक के नाम से जाना जाता है।

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यहां बसा है धरती का नागलोक, जहां एक साथ मिलेंगे सांपों की 70 से ज्यादा प्रजातियां, हर तरफ मंडराता है मौत का खतरा

हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं के साथ ही उनके प्रतीकों और वाहनों की पूजा-अर्चना करने की हमारे देश में काफी पुरानी पम्परा है। मान्यता है सावन माह में पंचमी (Nag panchami) के दिन नाग देवता की पूजा करने से सभी प्रकार के दोष खत्म हो जाते हैं। इस दिन नाग देवता को दूध चढ़ाया जाता है। सर्प दोष से मुक्ति के लिए नाग देवता की पूजा की जाती है। माना जाता है नाग देवता की पूजा करने से भोले भंडारी प्रसन्न हो जाते हैं।लेकिन क्या आपको पता है कि धरती पर आज भी नागलोक ( Naglok ) है।

आज के जमाने में नागलोक के होने की बात अजीब लगती है। पर जरा सोचिए अगर सच में आज के जमाने में नागलोक हो तो क्या होगा, और अगर वह नागलोक धरती पर ही हो तो क्या होगा। जी हां, छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में एक ऐसी जगह है जिसे नागलोक के नाम से जाना जाता है। यहां के जशपुर जिले को नागलोक के नाम से जाना जाता है। क्योकि जशपुर देशभर की सिर्फ एक ऐसी जगह है जहां कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांपों का बसेरा है।

गर्मियों और बारिश में यह जगह पूरी तरह सांपों (Snakes) से घिर जाता है। क्योकि गर्मी में तपती जमीन के कारण सांप बिल से बाहर घूमते रहते हैं। जशपुर में कई प्रकार के जहरीले सांपों की प्रजातियां पाई जाती है। यहां इन जहरीले सांपों की वजह से हर साल सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है। इस जगह पर सांप खतरे की आशंका मात्र पर हमला कर देता है।

मंदिर के बारे में तमाम तरह की जातक कथाएं प्रचलित है। कोई इसे द्वापर युग से जोड़ता है तो कोई इसे त्रेता युग से।लोगों का मानना है की जशपुर का समूचा इलाका दंडकारण्य वन में पड़ता था। यहां पर रावण की बहन शूर्पनखा का राज चलता था। वो शिव भक्त थीं, चिरैय डांड नामक जगह पर वो भगवान महादेव की पूजा करती थी। वनवास के दौरान भगवान श्रीरामचंद्र सीता माता के साथ इस नदी के किनारे बने मंदिर में पूजा करते थे। पाताल द्वार से नागराज आकर तब तक उन लोगों की रक्षा करते थे। रामचंद्र के जाने के बाद भी शिवलिंग के पास नाग पहरा देते रहते थे। कई लोगों ने यहां तक बताया कि मंदिर में उन्होंने शिवलिंग के पास काले नाग को देखा है।

यहां रह रहे बुजुर्गों का मानना है कि यहां पर जबसे आदिवासी निवास कर रहे हैं तभी से सांप (Snakes) भी रह रहे हैं। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जशपुर जिले में सांपों की 70 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं। जिनमें कुछ ऐसी प्रजातियां शामिल हैं जो देशभर में सिर्फ यहीं पाई जाती हैं। इस स्थान पर कोबरा (Cobra) की 4 अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती है। दुनियाभर में सबसे जहरीले सांप के नाम से मशहुर किंग कोबरा (King Cobra) की प्रजाति भी यहां पाई जाती है। इसके अलावा यहां पर वाइपर और माम्बा जैसे सांप भी पाए जाते हैं।

इस जगह के बारे में सुनने के बाद देश-विदेश से पर्यावरण प्रेमी जशपुर पहुंचते हैं। इसके साथ ही सरकार द्वारा इस जगह पर स्नैक पार्क (Snake Park) बनाने की तैयारियां भी जारी है। सांपों (Snakes) के आतंक के बावजूद यहां के लोगों ने कभी भी उन्हे यहां से हटाने की या खुद कहीं और बसने की कोशिश नहीं की है।

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