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Neet ug 2023 : रैंकर्स के पैरेंट्स बोले- बच्चों का डेडिकेशन देख हम पिघल जाते थे

नीट में सिटी के सारांश को 720 में 690, पूर्वी को 685 मार्क्स      

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रायपुर. नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) में शहर के सारांश पटेल को 720 में 690 अंक मिले हैं। वहीं पूर्वी जैन को 685 मार्क्स । हमने कुछ रैंकर्स के पैरेंट्स से भी बात की। उनका कहना था कि हमें कभी अपने बच्चों को सुबह नहीं उठाया। क्योंकि वे हमारे बोलने से पहले ही हर काम समय पर कर लिया करते थे। अलबत्ता हम उनसे यह जरूर कहते थे कि अब थोड़ा आराम कर लो। लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका डेडिकेशन ऐसा कि हम पिघल जाया करते थे। रैंकर्स का कहना है कि किसी भी चीज के लिए जुनून का होना जरूरी है। हमने खुद को पूरी तरह झोंका तब ऐसे नतीजे हमें मिल पाए।

कोविड से मिली प्रेरणा

सारांश ने बताया, कोविड के दौरान लोगों की मौत हो रही थी। डॉक्टरों की कमी बनी हुई थी। तभी मैंने इस फील्ड का प्लान किया। आगे मैं पीजी करूंगा। हालांकि मैंने 500 के भीतर रैंकिंग का सोचा था। स्ट्रैटेजी की बात करूं तो सुबह उठते ही फिजिक्स पढ़ा करता था। उसके बाद होमवर्क। दिनभर कोङ्क्षचग में पढ़ाई किया करता था। रात में रिवाइज। एंटरटेन के लिए मैं इंग्लिश वेबसीरीज देखता हूं। हालांकि एग्जाम की तैयारी के दौरान नहीं देखी। रैंकिंग के हिसाब से एम्स भोपाल या भुवनेश्वर में दाखिला मिल सकता है।

मम्मी बोलीं- खुद एक्टिव रहता था बेटा

सारांश की मॉम शशि ने बताया, मुझे इसे कभी उठाने की जरूरत नहीं पड़ी। लास्ट के दो-तीन महीने तो हमने इसे कभी सोते हुए नहीं देखा। हम जब सोकर उठते तो इसे पढ़ते हुए पाते और जब हमारे सोने से पहले तक पढ़ते हुए देखते। कई बार तो हमें समझाना पड़ता था कि अब सो जाओ। हैल्थ पर ध्यान दो। तंदुरुस्त रहोगे तभी तो पढ़ पाओगे।

11वीं से शुरू कर दी थी तैयारी

गगन शदाणी को 675 मार्क्स मिले। उन्होंने बताया, मैंने ग्यारहवीं से कोचिंग स्टार्ट कर दी थी। आठ से नौ घंटे पढ़ाई किया करता था। मेरा इरादा पीजी का है लेकिन अभी सब्जेक्ट डिसाइड नहीं किया है।

फिजिक्स कमजोर थी

क्षितिज सागर हेलोडे को 675 मार्क्स मिले हैं। वे बताते हैं, सुबह से रात आठ बजे तक तो कोचिंग में ही पढ़ाई चलती रही। लौटने पर एकाध घंटे पढ़ता या रेस्ट कर लेता था। मैंने रात में पढ़ाई नहीं की। मेरी केमेस्ट्री कमजोर थी इसलिए उसमें 151 नंबर मिला। एम्स और नॉर्मल मेडिकल कॉलेज की एक साथ परीक्षा के सवाल पर क्षितिज ने कहा, ये अच्छा है। क्योंकि पेपर देते वक्त लक फैक्टर मेटर करता है।

पहले अटेम्प्ट में मिली थी निराशा

क्षितिज के पिता डॉ. सागर हौम्योपैथिक हैं। उन्होंने बताया, फस्र्ट अटेंप्ट में नंबर 322 आए थे। बेटा बहुत निराश हो गया था। दूसरी बार फिर से मेहनत शुरू की। कोचिंग में अच्छा माहौल मिला खुद से ही स्मार्ट फोन वापिस कर दिया। आठ महीने तक इसने फोन नहीं छुआ। लगातार पढ़ते देख हम रोकते थे। कहना पड़ता था कि राउंड मार के आओ, वॉक कर लो। दसवीं से ही इसने डिसाइड कर लिया था कि नीट क्रैक करनी है।
दादा का सपना था डॉक्टर बनूं

पूर्वी जैन ने बताया, सोशल मीडिया छोड़ा तो नहीं था लेकिन समय कम देती थी। मेरे दादा जो अब गुजर गए हैं, वे मेरे बेस्ट फ्रेंड थे। वे चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूं। मुझे भी लगने लगा कि सोसायटी के लिए कुछ कंट्रीब्यूट करना चाहिए। फिजिक्स में कमजोर थी लेकिन उस पर ज्यादा मेहनत की। एक्स्ट्रा करिकुलम में मुझे सब पसंद था। चाहे डांस हो या सिंङ्क्षगग या फिर कूङ्क्षकंग। मैं पास्ता और मोमोज अच्छा बना लेती हूं। 2018 के बाद मैं फिल्म देखने थिएटर नहीं गई।

घर में पढ़ाई नहीं की

शुभम पटेल को 650 माक्र्स मिले हैं। वे कहते हैं, मैंने कभी डॉक्टरी का सोचा नहीं था। मैथ्स में इंट्रेस्ट कम था इसलिए बॉयो लिया। कई बार कुछ चीजें चलती रहती हैं और प्रेरणा मिल जाती है। ठीक ऐसा ही मेरे साथ हुआ। मैंने सिर्फ कोचिंग में ही पढ़ाई की। क्योंकि दिनभर का समय बहुत होता है। घर जाता तो खेलने का मन करता था। आगे मैं मेडिकल फील्ड से जुड़ा कोई बिजनेस करूंगा।

बॉयो को किया इंप्रूव

डीडीयू नगर की आरूषि पटेल को 655 मार्क्स मिले हैं। वे बताती हैं बचपन से ही डॉक्टरी में रुचि थी। बॉयो अच्छा था फि