
ऑनलाइन प्रोग्राम से लेकर बॉलीवुड तक में कॅरियर के नए रास्ते
संगीत पहले फिल्मों तक सीमित माना जाता था। अब संगीत और साउंड इफेक्ट का उपयोग हर जगह हो रहा है। इसके चलते इस क्षेत्र में जानकारों की डिमांड बढ़ रही है। स्टूडियो से लेकर लाइव परफॉर्मेंस तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। यहां कॅरियर की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। बैक ग्राउंड म्यूजिक में साउंड इफेक्ट के लिए वर्तमान टेक्निकल लोग रखे जा रहे हैं। बॉलीवुड में तो इनकी डिमांड है अब ये आयोजनों का प्रमुख हिस्सा भी हैं।
कोई चलचित्र या समारोह बिना साउंड इफेक्ट नहीं बन रहा है। लाइट माहौल से लेकर उसे हॉरर तक बनाने इसका उपयोग होता है। इन इफेक्ट को क्रिएट करने वाले म्यूजिक के जानकार होते हैं। इनमें संगीतकारों से लेकर इसकी अलग-अलग विधाओं को जानने वालों की जरूरत है। इस दिशा में कई बड़े स्टूडियो काम कर रहे हैं। जो जॉब मुहैया करा रहे हैं। छोटे शहरों में भी स्टूडियो खुले हैं। जिन्हें ऑनलाइन काम मिल रहा है। इसकी कोई सीमा नहीं है। इन सब वजहों से युवा भी इस दिशा में कॅरियर बनाने में रुचि दिखा रहे हैं और उन्हें पैसा भी अच्छा मिल रहा है।
योग्यता और कोर्स
बारहवीं के बाद संगीत से जुड़े कोर्सेज में एडमिशन लिया जा सकता है। सर्टिफिकेट कोर्स, बेचलर कोर्स, डिप्लोमा कोर्स और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के कोर्स हैं। आमतौर पर सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि एक वर्ष, बैचलर डिग्री कोर्स की तीन है। साउंड इंजीनियरिंग के कोर्स भी हैं।
इसलिए प्रोफेशनल चाहिए
म्यूजिक प्रोफेशनल सोमदत्त पंडा ने कहा कि कई लाइव प्रोग्राम्स, फिल्म, सीरियल, फैशन शो में इनकी जरूरत है। किसी भी परफॉर्मेंस में जान डालने का काम बैक ग्राउंड म्यूजिक प्रोफेशनल्स करते हैं। कम्प्यूटराइज्ड उपयोग ज्यादा है। इसलिए प्रोफेशनल्स की जरूरत है।
यहां से कर सकते हैं कोर्स
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़
भारतीय कला केंद्र, दिल्ली
दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
डिपार्टमेंट ऑफ म्यूजिक मुम्बई
बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी, बिहार
अजमेर म्यूजिक कॉलेज, अजमेर
Published on:
01 Dec 2022 02:12 pm
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