
मंत्रियों और अफसरों को रहना था इसलिए बदला प्लान बदला, अब नया रायपुर की बसाहट पिछड़ी
रायपुर. वर्ष 2015-16 में राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के मुताबिक नया रायपुर में कर्मचारियों के पहले मंत्रियों और आइएएस के कार्यालय के साथ आवास की भी शिफ्टिंग करनी थी। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एनआरडीए, पीडब्ल्यूडी, सामान्य प्रशासन व नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
पीडब्ल्यूडी ने सीएम हाउस, राजभवन और अधिकारियों के निवास का खाका भी तैयार कर लिया था, लेकिन अचानक इस योजना में ऐसा ट्विस्ट आया कि मंत्री-अधिकारियों के पहले यहां कर्मचारियों को रहने के लिए दबाव बनाया गया। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक तीन साल पहले जब योजना का खाका राज्य सरकार को पेश किया गया तो मंत्रियों और आइएएस ने नया रायपुर के सेक्टर-17 और सेक्टर-18 के आस-पास सुविधाओं की जानकारी मांगी। तब एनआरडीए ने विस्तृत प्लान पेश किया था, जिसमें शॉपिंग कॉम्पलेक्स, मल्टीप्लेक्स, सीबीडी आदि की जानकारी दी गई, लेकिन मंत्री और बड़े आइएएस, आइपीएस अधिकारी इसलिए राजी नहीं हुए, क्योंकि तय समय के बाद भी प्लान के मुताबिक सेक्टर के आस-पास किसी प्रकार की सुविधाएं विकसित नहीं हो सकी। मंत्रियों और आला अधिकारियों ने आवासीय प्रायोजन के लिए यहां जाने से इंकार कर दिया, वहीं इससे पहले कई कंपनियों पर सुविधाओं के लिए दबाव बनाया गया, लेकिन कंपनियों ने भी हाथ पीछे खींच लिए थे, क्योंकि उन्होंने भी बिना आबादी से लाभ-हानि का गणित बिठा लिया।
नया रायपुर में वर्ष 2018 तक 75 हजार आबादी का सपना भी काफूर नजर आ रहा है। एनआरडीए ने वर्ष 2015 में इसका लक्ष्य रखा था, जिसमें अधिकारियों ने दावा किया था कि तीन वर्षों के भीतर अलग-अलग सेक्टरों में 25 से 30 हजार मकान बनाए जाएंगे। सरकार ने मकान तो बना लिए, लेकिन आबादी नहीं आई। सेक्टर-27 और सेक्टर-29 में लक्ष्य के करीब मकान बनाए लिए गए, जिसमें सुविधाओं के अभाव की वजह से आबादी ने यहां रहने से इंकार कर दिया, जो रहे उन्हें भी यहां वर्तमान में सभी सुविधाएं नहीं मिल रही है। तत्कालीन एनआरडीए अध्यक्ष एन. बैजेंद्र कुमार ने भी वर्ष 2018 तक 75 हजार आबादी को लेकर पूरा भरोसा दिखाया था, जिसमें निजी बिल्डरों को भी मकान बनाने के लिए आकर्षित किया गया था।
एनआरडीए के मास्टर प्लान के मुताबिक नया रायपुर को तीन अलग-अलग लेयरों में विभाजित किया गया, जिसमें लेयर-1, लेयर-2 और लेयर-3 है। मास्टर प्लान के मुताबिक लेयर-1 को वर्ष 2011 तक विकसित करना था, जिसमें लगभग 1 लाख की आबादी को निवास करना था। लेयर-२ का विकास 2021 तक,वहीं लेयर-3 का विकास 2031 तक पूरा करना है।
केंद्र सरकार ने बीते वर्ष तीसरे लिस्ट में स्मार्ट सिटी के दायरे में नया रायपुर और बिलासपुर को शामिल किया था। देशभर के 30 शहरों में जिसमें नया रायपुर भी शामिल रहा। इन सब में 57393 करोड़ रुपए निवेश का रास्ता साफ हुआ था। तब सरकार ने उम्मीद जताई थी कि स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बाद योजनाबद्ध तरीके से काम होगा, बावजूद इसके सफलता नहीं मिली।
नया रायपुर विकास प्राधिकरण के सीइओ रजत कुमार ने कहा कि नया रायपुर में पहले के मुकाबले अब काफी सुविधाएं है। निजी रियल एस्टेट कंपनी का यहां शॉपिंग कॉम्पलेक्स तैयार है। रोजमर्रा की जरूरतों के अलावा आवास के लिए आवश्यक सुविधाओं को पहुंचाने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।
Published on:
27 Aug 2018 10:15 am
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