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महंगाई की मार से होली के रंग पड़े फीके, बाजारों से रौनक गायब

होली त्योहार आने में बस चंद दिन ही शेष हैं। वहीं, होली में बाजारों से रौनक गायब है। ऐसा लगता है कोरोना का भय अब तक लोगों के मन से गया नहीं है। लोगों में होली त्योहार को लेकर उत्साह नजर नहीं आ रहा है। नगाड़ों की थाप सुनाई नहीं दे रही है। जबकि बसंत आगमन के साथ ही होली का अलग ही रोमांच होता था। होली पर्व के 15 दिन पहले तैयारी शुरू हो जाती थी। आज परंपरा और अपनापन विलुप्त के कगार पर है।

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महंगाई की मार से होली के रंग पड़े फीके, बाजारों से रौनक गायब

महंगाई की मार से होली के रंग पड़े फीके, बाजारों से रौनक गायब

पलारी। होली त्योहार आने में बस चंद दिन ही शेष हैं। वहीं, होली में बाजारों से रौनक गायब है। ऐसा लगता है कोरोना का भय अब तक लोगों के मन से गया नहीं है। लोगों में होली त्योहार को लेकर उत्साह नजर नहीं आ रहा है। नगाड़ों की थाप सुनाई नहीं दे रही है। जबकि बसंत आगमन के साथ ही होली का अलग ही रोमांच होता था। होली पर्व के 15 दिन पहले तैयारी शुरू हो जाती थी। आज परंपरा और अपनापन विलुप्त के कगार पर है।
वहीं, व्यापारियों के अनुसार इस बार महंगाई की वजह से बाजारों में मंदी का असर दिखाई दे रहा है। रंग, गुलाल, पिचकारी, मिठाई के दुकानदार बाजार में मंदी का असर बता रहे हैं। विगत 25 वर्षों से रंग ,गुलाल, पिचकारी के विक्रेता महेंद्र साहू ने बताया कि इस वर्ष त्योहार में गुलाल, पिचकारी, मुखौटों व अन्य आइटम में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फिलहाल लोग होली के पिचकारी सामान खरीदने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उम्मीद है आने वाले दिनों में बाजार की रौनक लौटेगी, जिससे कम से कम लागत तो निकलेगी।
अग्रवाल किराना स्टोर्स के संचालक लव अग्रवाल ने बताया कि खाने-पीने के सामानों के दामों में बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए लग रहा है कि इस बार त्योहार में बिक्री कम रहेंगी। इसलिए इस बार अन्य वर्षो की तुलना में सामान कम मंगवाए हैं। तेल सहित खाद्य पदार्थों की बेतहाशा मूल्य वृद्धि से गृहिणियों की बजट बिगड़ गई है। त्योहार में धंधा मंदा रहने वाला है। पोल्ट्री फार्म व्यवसायी रोहित वर्मा ने बताया कि आने होली त्योहार में चिकन की मांग हमेशा की तरह अच्छी रहने की संभावना है। इसलिए देशी व ब्रायलर मुर्गे मंगवाना शुरू कर दिया हूं। कान्हा रेस्टोरेंट संचालक कान्हा जायसवाल ने बताया कि इस बार होली मे मिठाई की डिमांग पहले से कम है। इसे देखते हुए मिठाई बनाने का काम हो रहा है। खाने-पीने की सामानों में बेतहाशा वृद्धि एक कारण है। लोग जितने कम में काम चल जाए, सिर्फ उन्हंी जरूरी चीजों को ही खरीद रहे हैं।

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