
संविलियन व अन्य मांगों पर आने वाले प्रशासनिक पेंच को देखते हुए कमेटी ने फैसला लिया है कि शिक्षाकर्मी संघों के एक-दो शीर्ष पदाधिकारियों को बुलाकर कमेटी के सामने प्रजेंटेशन लिया जाएगा। इसके लिए 16 मार्च को शाम 4 बजे का समय तय किया गया है।
बताया जाता है कि बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से संविलियन के कई प्रस्ताव कमेटी के सामने रखे गए। इन प्रस्तावों से शिक्षाकर्मियों को नुकसान कम और फायदा अधिक होगा, लेकिन आगे आने वाले संभावित विवाद से बचने के लिए कमेटी ने शिक्षाकर्मियों को बुलाने का फैसला लिया है।
अधिकारी संविलियन की बात पर कुछ भी बोलने से इसलिए बच रहे हैं,क्योंकि कमेटी का गठन केवल तीन बिंदुओं के लिए हुआ है। इसमें संविलियन की बात शामिल नहीं है। हालांकि शिक्षाकर्मियों की नाराजगी को देखते हुए कमेटी इस बिंदुओं पर भी चर्चा कर रही है, ताकि आने वाले दिनों में ज्यादा होमवर्क नहीं करना पड़े और मुख्यमंत्री के सामने भी संविलियन के फायदे और नुकसान को रखा जा सके।
कमेटी का मानना है कि शिक्षाकर्मियों के प्रजेंटेशन से उनकी मांगों को समझने में आसानी होगी। साथ ही मौके पर उनकी मांगों को पूरा करने में आने वाली अड़चनों पर भी विस्तार से चर्चा हो सकेगी। इस फैसले के बाद पंचायत विभाग की ओर से शिक्षाकर्मी संघ से जुड़े नेताओं को बैठक में शामिल होने की सूचना जारी कर दी गई है।
शिक्षाकर्मी मोर्चा प्रांतीय संयोजक वीरेन्द्र दुबे ने कहा कि हमें संविलियन चाहिए यह बात किसी से छिपी नही है। स्वयं मुख्यमंत्री की घोषणा रही है। फिर बार-बार इसी मुद्दे पर चर्चा करना समझ से परे हैं। हम स्थायी समाधान चाहते हैं और यदि सरकार का रुख सकारात्मक है, तो यह अंतिम बैठक होनी चाहिए।
शिक्षाकर्मी मोर्चा प्रांतीय संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि मुख्य सचिव के साथ होने वाली बैठक में संविलियन की मांग को प्रमुखता से दस्तावेजों के साथ रखा जाएगा। इसके अलावा क्रमोन्नति और शिक्षाकर्मी वर्ग तीन समानुपातिक वेतनमान देने की बात को भी प्रमुखता से रखा जाएगा।
Updated on:
10 Mar 2018 04:35 pm
Published on:
10 Mar 2018 12:52 pm
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