
आईजीकेवी में लगे एग्जीबिशन में मशरूम का पापड़ देखती युवती।
पापड़ सुनते ही हमें चावल, मूंग, उड़द का ही ख्याल आता है, लेकिन इस क्या हो अगर हमें मशरूम के स्वाद और उसके छिपे खजाने से भरपूर पापड़ मिल जाए। मशरूम को न्यूट्रिएंट्स का खजाना माना जाता है। इसमें भरपूर प्रोटीन तो होता है, साथ ही विटामिन सी, विटामिन बी, विटामिन डी, कॉपर, पोटैशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम, फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सिडेंट जैसे न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। ये सभी हमारी तंदुरुस्ती के लिए जरूरी भी हैं। इन्हीं बातों को ध्यान मेें रखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का मशरूम रिसर्च सेंटर कुछ न कुछ प्रयोग करते रहता है। इस बार रिसर्च सेंटर में मशरूम की बड़ी-पापड़ और बिस्किट बनाया गया है।
तीन प्रतिशत मशरूम पाउडर
मशरूम सेंटर के प्रमुख वैज्ञानिक नरेंद्र लाखपाले ने बताया कि विशुद्ध मशरूम से कोई भी चीज तैयार नहीं की जा सकती है। इसके लिए हमने एक स्टैंडर्ड तय किया है, जिसके तहत एक किलो सामग्री में 30 ग्राम मशरूम पाउडर मिक्स करना है। हालांकि उस 30 ग्राम मशरूम पाउडर की वैल्यू 300 ग्राम फ्रेश मशरूम के बराबर होती है।
मार्केटिंग नहीं करते
वैज्ञानिक हरविंदर कुमार कहते हैं, चूंकि यह रिसर्च सेंटर है। इसलिए बनाकर बेचने जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। हमारे यहां मशरूम प्रोड्यूस करने की ट्रेनिंग दी जाती है, खासतौर पर हम स्वसहायता समूह की महिलाओं को ट्रेनिंग देते हैं। हमने कई समूह को मशरूम से पापड़-बड़ी बनाने के लिए प्रशिक्षित किया है।
बालोद, दंतेवाड़ा में हो रहा प्रोडक्शन
वैज्ञानिकों ने बताया कि बालोद, दंतेवाड़ा, कवर्धा और धमतरी के स्व सहायता समूह और कुछ व्यक्तियों को मशरूम से पापड़ और बड़ी बनाने की ट्रेनिंग दी है। वे अपने क्षेत्र में इसकी बिक्री कर कमाई कर रहे हैं।
Published on:
01 Mar 2024 11:56 pm
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