पहली बार: वन्यप्राणियों के शिकार और लकड़ी की अवैध कटाई को देखते हुए वन विभाग ने की तैयारी
राकेश टेंभुरकर@रायपुर. टाइगर रिजर्व उदंती-सीतानदी (गरियाबंद) में वन विभाग पहली बार 2 अत्याधुनिक ड्रोन कैमरे से निगरानी करेगा। करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से इसे खरीदा जाएगा। इसके जरिए वन्य प्राणियों, शिकारियों के साथ ही लकड़ी की अवैध कटाई एवं तस्करी करने वालों पर निगाह रखी जाएगी। खरीदी करने के लिए वन विभाग द्वारा निविदा जारी की गई है। आवेदन जमा होने के बाद 1 अक्टूबर को निविदा प्रपत्र को खोला जाएगा। परीक्षण में खरा उतरने पर 1 नवंबर से ड्रोन को टाइगर रिजर्व में तैनात किया जाएगा। बताया जाता है कि ओडिशा की सीमा से सटा होने के कारण टाइगर रिजर्व में तस्करी और अवैध कटाई करने वाला गिरोह अक्सर सक्रिय रहता है। सीमांत इलाके की निगरानी नहीं हो पाने के कारण खुलेआम खेल चलता है। इसकी शिकायत मिलने के बाद ड्रोन कैमरा खरीदा जा रहा है।
ड्रोन की ये है खासियत
अत्याधुनिक ड्रोन को जमीन से करीब 20 मीटर की उचांई तक उड़ाया जा सकेगा। वहीं 15 मीटर तक की ऊंचाई से सटीक लेने की क्षमता वाले कैमरे इसके लगाए गए है। एक ही स्थान से इसे 10 किमी तक रेंज को कवर किया जा सकेगा। रिमोट से उडऩ़े वाले ड्रोन के मॉनिटर पर निगरानी की जाएगी। वहीं स्पेशल चश्मा पहनकर मॉनिटर पर देखने पर उचांई से उडऩे का अहसास होगा। इसके जरिए जंगल के भीतर के मैदान, रास्ते, जलाशय, पहाडी़ के साथ ही रिहायशी इलाकों की निगरानी की जाएगी। साथ ही मॉनिटर के जरिए मैप भी बनाया जाएगा। किसी भी संदिग्ध के दिखाई देने पर तुरंत जूम कैमरे के जरिए उसकी फोटो ली जाएगी।
वन्यजीवों की गणना करने ट्रैप कैमरा
टाइगर रिजर्व उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 120 अतिरिक्त ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। इसके जरिए वन्य प्राणियों की निगरानी के साथ ही उनकी गणना की जाएगी। वन विभाग का अमला इसकी खरीदी की कवायद में जुटा हुआ है। इसके लिए करीब 25 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। बता दें कि इस समय उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 170 टै्रप कैमरे लगाए गए हैं। इसके जरिए टाइगर रिजर्व के कुल 1842.54 वर्ग किमी. वन क्षेत्र की निगरानी की जाएगी। इसमें 851.09 वर्ग किमी. मुख्य क्षेत्र तथा 991.45 वर्ग किमी सहायक क्षेत्र शामिल हैं।
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व उपनिदेशक वरूण जैन ने बताया कि ड्रोन और ट्रैप कैमरा की खरीदी के लिए निविदा जारी की गई है। इसका आपूर्ति होते ही विभाग द्वारा संबंधित इलाकों में उपयोग किया जाएगा।