ओम माथुर जी के कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर चुनाव के संबंध में कोई उल्लेख नहीं है। वहां जाने की भी बात नहीं है। न ही चुनाव के बारे में चर्चा का कोई उल्लेख है। इसका मतलब है कि उनके प्रभारी को भी मालूम है कि भानुप्रतापपुर उप चुनाव भाजपा बुरी तरह से हार रही है। वे अपने श्रीगणेश में ही पराजय का टीका नहीं लगवाना चाहते।
भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर 21 नवंबर को राजधानी रायपुर आएंगे। उनके रायपुर प्रवास के कार्यक्रम की रुपरेखा भी प्रदेश भाजपा ने तैयार कर ली है। माथुर प्रदेश प्रभारी बनने के बाद पहली बार रायपुर आ रहे हैं। उनके स्वागत को लेकर प्रदेश भाजपा संगठन ने तैयारी शुरू कर दी है। माथुर 21 नवंबर को दोपहर 1.40 बजे रायपुर पहुंचेंगे।
इसके बाद अगले दिन 22 नवंबर को वे कोर कमेटी, प्रदेश पदाधिकारी, प्रदेश मोर्चा अध्यक्ष, जिला प्रभारी, जिला अध्यक्ष, संभागीय प्रभारी, प्रदेश महामंत्री, सांसद विधायकों की बैठक लेंगे। इसी दिन वे भाजपा नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात भी करेंगे। 23 नवंबर को सभी मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी और सभी प्रकोष्ठों के संयोजक, सहसंयोजकों की बैठक लेंगे।
24 नवंबर को सबह से दोपहर तक वे व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे। शाम को ललित महल में आयोजित एक शादी कार्यकम में शामिल होंगे। बता दें कि भाजपा नेतृत्व ने ओम माथुर को प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी को हटाकर प्रदेश प्रभारी की कमान 9 सितंबर को सौंपी थी।
कांग्रेस ने किया पलटवार
कांग्रेस प्रदेश संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है, ओम माथुर जानते हैं कि भाजपा भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव नहीं जीत रही है। इसलिए वे वहां जा भी नहीं रहे हैं। शुक्ला ने कहा, छत्तीसगढ़ में विपक्ष में आने के बाद भाजपा दो-तीन प्रभारी बदल चुकी है। अब ओम माथुर जी प्रभारी बनाये गये हैं। उनके सारे के सारे नेताओं को मालूम है कि छतीसगढ़ में भाजपा की संभावनाएं अगले एक-डेढ़ दशक तक लगभग शून्य है। शुक्ला ने कहा, ओम माथुर जी का चार दिन का कार्यक्रम आया है। इस बीच भानुप्रतापपुर का चुनाव चल रहा है, जहां भाजपा बड़ी-बड़ी बातें कर रही है। ओम माथुर जी के कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर चुनाव के संबंध में कोई उल्लेख नहीं है। वहां जाने की भी बात नहीं है। न ही चुनाव के बारे में चर्चा का कोई उल्लेख है। इसका मतलब है कि उनके प्रभारी को भी मालूम है कि भानुप्रतापपुर उप चुनाव भाजपा बुरी तरह से हार रही है। वे अपने श्रीगणेश में ही पराजय का टीका नहीं लगवाना चाहते।