23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

वन नेशन वन कार्ड से सामने आया बड़ा घोटाला, 35 फीसदी राशन का हो रहा था फर्जी वितरण

- सितंबर में राशन दुकानों को मिलेगा 35 फीसदी कम खाद्यान्न
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Bhupesh Tripathi

•

Updated: 10 Aug 2021, 4:27 PM IST

one_rationcard.jpg

रायपुर . वन नेशन वन कार्ड सिस्टम आने के बाद राशन दुकानों में हो रही गड़बडिय़ां सामने आने लगी हैं। एक आकलन के मुताबिक जिले में राशन दुकानों से 35 फीसदी राशन का फर्जी वितरण हो रहा था। खाद्य विभाग से मिले आंकड़े बताते हैं कि जून माह में जिले की राशन दुकानों में शत-प्रतिशत वितरण दिखाया गया था। जुलाई माह में शहर की सिर्फ दो राशन दुकानों के वितरण का आंकडा ही 95 प्रतिशत रहा। इसमें आईडी क्रमांक 1045 में 647 कार्ड में 625 और आईडी 1042 में 1314 कार्ड में से 1249 को खाद्यान्न का वितरण किया गया।

अहम बात यह है कि 130 में से 53 राशन दुकानों में 65 फीसदी ही वितरण किया गया। आईडी क्रमांक 1040 में 41.41 प्रतिशत और 1037 में 1777 में से 767 (43 प्रतिशत) कार्डधारियों को वितरण किया गया। इसी तरह आईडी क्रमांक 1030 में 46 प्रतिशत ही वितरण किया गया। ऐसे ही 10 फीसदी दुकानों में सिर्फ 50 प्रतिशत से कम वितरण किया गया। इससे साफ है कि 50 हजार कार्डधारी खाद्यान्न लेने नहीं पहुंचे, इनमें 46 प्रतिशत एपीएल कार्डधारी हैं।

जिन दुकानों में कम वितरण वहां होगी कटौती
सितंबर में नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा उन राशन दुकानों के खाद्यान्न आवंटन में कटौती की जाएगी। जुलाई में कम वितरण से साफ है कि नए सिस्टम से राशन दुकानों में होने वाले फर्जी वितरण का भेद साफ हो गया है। वन नेशन वन कार्ड सिस्टम खाद्यान्न वितरण में हो रही कालाबाजारी रोकने के लिए जिले की राशन दुकानों में शुरू कर दिया गया है। नई तकनीकी से खाद्यान्न की चोरी पर काफी हद तक अंकुश लग गया है।

दुकानदारों का यह तर्क
दुकानदारों का तर्क है कि सिस्टम की कुछ खामियों की वजह से शत-प्रतिशत वितरण नहीं हो पाया है। इससे एक कार्डधारी को खाद्यान्न देने में तकरीबन 8 से 10 मिनट लग रहा है। नए सिस्टम से मिली नई ई-पॉस मशीनों का बैटरी बैकअप भी सिर्फ 4 घंटे है। राजधानी में तकरीबन 100 राशन दुकानें ऐसी हैं, जिनमें 2 से 3 हजार राशन कार्ड हैं। कई वार्डों में सिर्फ एक ही दुकान है। ऐसे में माह के 26 दिन भी वितरण किया गया है। कार्डधारियों को वितरण किया जाता है तो भी शत-प्रतिशत वितरण होना संभव नहीं हो पाया। इस वजह से अब वार्डों में राशन दुकानों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

फूड इंस्पेक्टरों का फर्जी सत्यापन भी आया सामने
नई तकनीकी के बाद अब खाद्य निरीक्षकों के द्वारा हर माह के अंत में दुकानों का किया जाने वाला सत्यापन व्यर्थ हो गया है। नए सिस्टम से खुद-ब-खुद दुकानों में वितरण और बचत की संपूर्ण जानकारी मुख्यालय तक पहुंच रही है। वितरण कम होने से फूड इंस्पेक्टरों के द्वारा किए जाने वाले सत्यापन की हकीकत भी सामने आ चुकी है।

इस सिस्टम से ही वितरण
आधार कार्ड, अंगूठा निशान और आंखों की पुतली से राशन दिया जा रहा है। राशनकार्ड और प्राप्त होने वाले खाद्यान्न को पीओएस मशीन और इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन को ब्लू टूथ के साथ जोड़ा जा रहा है।

इस सिस्टम से गड़बड़ी की पूरी गुंजाइश समाप्त हो गई है। बीते माह 50 हजार राशन कार्डों में वितरण नहीं हुआ है, इस माह फिर वितरण देखा जाएगा इसके बाद आवंटन में कटौती की जाएगी।
- तरुण राठौर, खाद्य नियंत्रक रायपुर