रायपुर

संभल कर कराएं इलाज, रायपुर के एक तिहाई अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं, एक-दो कमरों में चल रहे सुपर स्पेशलियटी हॉस्पिटल

राजधानी में ऐसे कई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल छोटे कमरों या बिना विशेषज्ञों की टीम के साथ चलाए जा रहे हैं। ऐसे जितने भी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल हैं, वे झोलाझाप डॉक्टर चला रहे है। समता कॉलोनी, चौबे कॉलोनी, पचपेड़ी नाका, न्यू राजेंद्रनगर, देवेंद्रनगर, टाटीबंध सहित राजधानी के सभी हिस्सों में ऐसे कई प्राइवेट अस्पताल देखे जा सकते हैं, जो बिना नर्सिंग होम एक्ट के तहत चल रहे हैं।

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Nov 19, 2022
file photo

राजधानी में ऐसे कई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल छोटे कमरों या बिना विशेषज्ञों की टीम के साथ चलाए जा रहे हैं। ऐसे जितने भी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल हैं, वे झोलाझाप डॉक्टर चला रहे है। आईएमए के रायपुर जिलाध्यक्ष डॉ. विकास अग्रवाल का कहना है, ऐसे कई लोग हैं, जो नामी और क्वालीफाई डॉक्टरों के नाम हॉस्पिटल के फ्रंट में लिखकर मरीजों को बरगलाते हैं और उनका अस्पताल में इलाज शुरू कर देते हैं। मरीजों को बाद में पता चलता है कि यह हॉस्पिटल किसी और का है। गुढ़ियारी के ही एक हॉस्पिटल में ही यह खेल लंबे समय से चल रहा है। ऐसे अस्पतालों की वे डॉक्टर शिकायत भी करते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।

इलाज में लापरवाही के कारण करीब 20 दिन पहले भिलाई के एक प्राइवेट अस्पताल में 10 माह के बच्चे की मौत हो गई। इस मामले में डॉक्टरों सहित 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। ऐसे कई मामले बीच-बीच में सामने आते रहते हैं। मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ करने वाले सैकड़ों हॉस्पिटल राजधानी रायपुर में भी हैं।

राजधानी में कई जगहों पर ऐसे छोटे हॉस्पिटल मिल जाएंगे, जहां किसी एक बीमारी को लेकर अस्पताल तो खोला गया है लेकिन वहां इलाज कई बीमारियों का किया जा रहा है। समता कॉलोनी में एक ऐसा ही अस्पताल देखने को मिला। मल्टी स्पेशलिटी डेंटल क्लीनिक में डायबिटीज, थॉयराइड और मोटापा का इलाज भी किया जा रहा है। खास बात यह है कि डेंटल स्पेशलिस्ट ही इन बीमारियों का भी इलाज कर रहा है।

रायपुर में ऐसे प्राइवेट अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिसमें से एक तिहाई का नर्सिंग होम एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। रायपुर जिले में 289 प्राइवेट अस्पताल और करीब साढ़े 4 सौ क्लीनिक रजिस्टर्ड हैं, लेकिन यहां हजार के पार निजी अस्पताल चल रहे हैं। कई ऐसे हैं, जो एक-दो कमरे में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल चला रहे हैं। बिना विशेषज्ञों और स्टाफ के चल रहे इन हॉस्पिटलों के लिए ब्रोकर भी काम करते हैं। समता कॉलोनी, चौबे कॉलोनी, पचपेड़ी नाका, न्यू राजेंद्रनगर, देवेंद्रनगर, टाटीबंध सहित राजधानी के सभी हिस्सों में ऐसे कई प्राइवेट अस्पताल देखे जा सकते हैं, जो बिना नर्सिंग होम एक्ट के तहत चल रहे हैं।

लैब चला रहे 10वीं फेल टेक्नीशियन
राजधानी में सिर्फ हॉस्पिटल ही नहीं कई लैब भी फर्जी तरीके के चल रहे हैं। कई तो ऐसे हैं जो 10 वीं फेल हैं और खून-पेशाब की जांच सीखने के बाद टेक्नीशियन बन गए हैं। बिना विशेषज्ञों के यह लैब भी चला रहे हैं। ये टेक्नीशियन, बिना अनुमति के कई वरिष्ठ डॉक्टरों के सील और साइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार रिपोर्ट भी सही नहीं रहती है। ऐसे में मरीज को देखने वाले डॉक्टर कई बार दोबारा जांच की सलाह दे देते हैं।

कार्रवाई होगी
सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा, ऐसे प्राइवेट अस्पतालों की शिकायत मिली है। कई बिना रजिस्ट्रेशन तो कई नर्सिंग होम एक्ट को ताक में रखकर अस्पताल का संचालन कर रहे हैं। जल्द ही ऐसे अस्पतालों का निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।

रजिस्ट्रेशन में दिक्कत
इस मामले में आईएमए रायपुर जिलाध्यक्ष डॉ. विकास अग्रवाल ने कहा कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2013 में लागू हुआ है। इसके पहले के जो हॉस्पिटल हैं उन्हें नई जगहों पर शिफ्ट करना पॉसिबल नहीं है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा चिकित्सा संस्थानों को ऑथराइजेशन देने में काफी देर की जाती है और यही समस्या फायर एनओसी को लेकर भी है। इसके कारण दिक्कतें आ रही हैं।

Published on:
19 Nov 2022 03:24 pm
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