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CM साय के जनदर्शन में 3 घंटे में 1950 आवेदन निपटाने का दावा, कांग्रेस बोली- 6 सेकंड में एक फैसला कैसे?

CM Sai Jandarshan: CM साय ने दावा किया है कि 8 जनवरी को आयोजित जनदर्शन में मात्र तीन घंटे के भीतर 1950 आवेदनों का निराकरण किया गया।

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CM साय के जनदर्शन में 3 घंटे में 1950 आवेदन निपटाने का दावा, कांग्रेस बोली- 6 सेकंड में एक फैसला कैसे?(photo-patrika)

CM साय के जनदर्शन में 3 घंटे में 1950 आवेदन निपटाने का दावा, कांग्रेस बोली- 6 सेकंड में एक फैसला कैसे?(photo-patrika)

CM Sai Jandarshan: छत्तीसगढ़ सरकार के 2026 के पहले जनदर्शन कार्यक्रम को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दावा किया है कि 8 जनवरी को आयोजित जनदर्शन में मात्र तीन घंटे के भीतर 1950 आवेदनों का निराकरण किया गया। सरकार के इस दावे के सामने आने के बाद कांग्रेस ने तीखा तंज कसते हुए सवाल खड़े किए हैं।

CM Sai Jandarshan: कांग्रेस का तंज: 6 सेकंड में एक आवेदन का निपटारा ‘अद्भुत’

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यदि तीन घंटे में 1950 आवेदन निपटाए गए, तो औसतन हर 6 सेकंड में एक आवेदन पर कार्रवाई हुई। इसी गणना को आधार बनाते हुए कांग्रेस ने सरकार पर कटाक्ष किया है। कांग्रेस ने कहा कि इतनी कम समयावधि में गंभीर जनसमस्याओं का समाधान संभव नहीं है और यह आंकड़ों का खेल हो सकता है।

सरकार का पक्ष: जनदर्शन सुशासन की कसौटी

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद ही सुशासन की असली पहचान है। बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जनदर्शन के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याएं सुन रहे हैं और कई मामलों में तत्काल राहत भी दी जा रही है, जबकि शेष आवेदनों को संबंधित विभागों को भेजकर समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए गए।

मौके पर मिली राहत, कई आवेदन विभागों को भेजे गए

सरकारी जानकारी के अनुसार जनदर्शन में कुछ जरूरतमंदों को तत्काल लाभ मिला। उदाहरण के तौर पर जीवन दास मानिकपुरी और भारत साहू को मौके पर ही बैटरी चलित ट्राइसिकल प्रदान की गई। वहीं बड़ी संख्या में आए आवेदनों को विभागीय प्रक्रिया के तहत अग्रेषित किया गया।

बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने

सरकार के दावों पर कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने सवाल उठाए, तो वहीं बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने पलटवार किया। बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस शासन में जनदर्शन से किसे क्या लाभ मिला, इसका कोई ठोस आंकड़ा आज तक सामने नहीं आया, जबकि साय सरकार में जनता के काम हो रहे हैं।

आंकड़ों की होड़ में छवि को लेकर सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता से सीधे संवाद की पहल सकारात्मक है, लेकिन यह भी जरूरी है कि प्रस्तुत किए जा रहे आंकड़े यथार्थ और पारदर्शी हों। कहीं ऐसा न हो कि अधिकारी बेहतर प्रदर्शन दिखाने के दबाव में आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें, जिससे सरकार और मुख्यमंत्री की छवि पर सवाल खड़े हों। जनदर्शन को लेकर सरकार और विपक्ष के दावे-प्रतिदावे के बीच अब निगाह इस बात पर टिकी है कि 1950 आवेदनों के वास्तविक और स्थायी समाधान कितने समय में जमीन पर नजर आते हैं।

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