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मौसम में उतार-चढ़ाव से वायरल फीवर व लूज मोशन के मरीज बढ़े अस्पताल में रोज दो से ढाई सौ मरीज

मेडिसीन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. आरएल खरे ने बताया, जनरल ओपीडी में 50 फीसदी यानी दो से ढाई सौ मरीज वायरल के पहुंच रहे हैं। बारिश में भी लोग स्ट्रीट फूड खा रहे हैं। इससे लूज मोशन, डायरिया की शिकायत मिल रही है। डॉ. वाई मल्होत्रा ने बताया, बारिश से बहुत ज्यादा मरीज बढ़े हैं। हाई ग्रेड फीवर के साथ मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। जो तीन-चार दिनों तक रह रहा है। डेंगू, मलेरिया के भी मरीज पहुंच रहे हैं।

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- वायरल और एलर्जी अटैक का दिख रहा असर

रायपुर. बीते चार दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश ने लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है। सबसे ज्यादा बच्चे व वृद्ध वर्ग प्रभावित हुए हैं। सर्दी, खांसी, बुखार, सिर दर्द, डायरिया और चर्म रोग जैसी बीमारियां की समस्या लेकर मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल, जिला अस्पताल पंडरी व कालीबाड़ी, आयुर्वेद कॉलेज परिसर स्थित शिशु अस्पताल की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

ओपीडी आने वाले लोगों में 50 फीसदी वायरल फीवर व लूज मोशन से पीड़ित हैं। इसके अलावा डेंगू, मलेरिया व स्वाइन फ्लू के मामले भी सामने आ रहे हैं। रायपुर सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल का कहना है, बारिश के मौसम में बच्चे सबसे ज्यादा बीमार पड़ जाते हैं। फ्लू, वायरल फीवर, डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, पीलिया शरीर में दर्द की समस्या सामने आती हैं। बरसात कई तरह की बीमारियां भी साथ लेकर आती है। इसीलिए बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

पंडरी: एक स्वाइन फ्लू का मरीज भर्ती
सिविल सर्जन डॉ. पीके गुप्ता ने बताया, सर्दी, खांसी, बुखार के मरीज ओपीडी पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल पंडरी में रोजाना करीब 450 और कालीबाड़ी अस्पताल में ढाई सौ कुल 7 सौ की रोजाना ओपीडी रहती है। कालीबाड़ी अस्पताल खासकर महिलाओं व बच्चों के लिए हैं, जहां वह मौसमी बीमारियों की परेशानियां लेकर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया, पंडरी अस्पताल में एक स्वाइन फ्लू का मरीज भी भर्ती है।

शिशु अस्पताल: चार-पांच दिन में ठीक हो रहे
इंचार्ज डॉ. निलय मोझरकर ने बताया, बच्चों को वायरल इंफेक्शन जल्दी होता है। ऐसे में सर्दी, खांसी, बुखार, डायरिया से पीड़ित बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे रोजाना की ओपीडी में भी इसकी वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया, चार से पांच दिन में बच्चे ठीक भी हो रहे हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति देखने को नहीं मिल रही है।

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