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Patrika Key Note: पद्मश्री फूलबासन बोलीं- डर को ढाल बनाकर आगे निकल गई…

Patrika Key Note: पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती वर्ष के तहत रविवार, 20 अप्रैल को रायपुर की होटल बेबीलॉन केपिटल में पत्रिका की-नोट का आयोजन किया गया।

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Patrika Key Note: पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती वर्ष के तहत रविवार, 20 अप्रैल को रायपुर की होटल बेबीलॉन केपिटल में पत्रिका की-नोट का आयोजन किया गया। पत्रिका की-नोट सामाजिक मुद्दों पर गहन चिंतन की शृंखला है, जो देशभर में आयोजित की जाती है। इस बार के संवाद कार्यक्रम का विषय रहा- नए दौर की भागदौड़ में पीछे छूटते भारतीयता के संस्कार…।

जिसमें अतिथि वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी, आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर रामकुमार काकानी, सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री फूलबासन देवी और यंग एंटरप्रेन्योर अपूर्वा त्रिवेदी ने संबोधित किया। कार्य₹म का संचालन गौरव गिरिजा शुक्ला ने किया। की-नोट में शहर के हर वर्ग से चिंतक बुद्धिजीवी जुटे।

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Patrika Key Note: सबसे अच्छा माता-पिताके साथ रहकर उनसे मिला संदेश

जिन्दगी में मैं गरीबी, समाज, पड़ोसी और महिला होने से डरती थी। कभी सोची नहीं थी कि कुछ कर पाऊंगी, लेकिन एक दिन मैंने उस डर को हरा दिया। डर को ढाल बनाकर आगे निकल गई। जिंदगी में दुश्मन बाहर नहीं हमारे अंदर है। आज हमें सोचने की जरूरत है। सोशल मीडिया का जमाना है, जहां अच्छे बच्चे भी बिगड़ रहे हैं।

जहां छोटे बच्चे जो जान रहे हैं, सब अच्छा है, लेकिन जो सबसे अच्छा है वो मां बाप के साथ रहकर, उनसे मिलने वाला संदेश है। लेकिन मां-बाप के साथ पांच मिनट बैठने में भी बच्चों को मजा नहीं आता। मां-बाप के पास आधा घंटा के पास बैठे तो अनपढ़ मां-बाप के पास भी बहुत ज्ञान है। लेकिन हम उन्हें उन्हें वृध्दाआश्रम भेज देते है। पहले बुजुर्ग संस्कार देते थे, लेकिन आज डेढ़ साल के बच्चे को मोबाइल पकड़ा दिया जाता है। बच्चे को कार्टून दिखा रहे है तो बच्चा भी कार्टून की तरह ही होगा। पैसा देकर सम्मान मत करो, जिंदगी में उस इंसान को जीना सीखा दो।

सुधारने का काम कर रही पत्रिका

हम सभी के प्रिय गुलाब कोठारीजी को नमन करती हूं। जो दुनिया को बचाने, महिला उत्पीड़न पर काम कर रहे है। उजड़ते घरों को सुधारने का काम पत्रिका कर रही है। इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

हम पढ़े लिखे होने के बाद भी नहीं गढ़ पा रहे

सबसे ज्यादा विकराल रूप ले रही है पानी और हवा की समस्या। स्थिति ऐसी है कि हम अपने बुजुर्ग को गुस्सा करते हैं कि घर नहीं है खेत नहीं है, हमारे लिए कुछ नहीं बचाया। हर कोई कहता है कि हम पढ़े लिखे है लेकिन वो लोग अनपढ़ थे और अनपढ़ ही रहेंगे, लेकिन हम पढ़े लिखे होने के बाद भी गढ़ नहीं पा रहे है, पर जो पढ़े लिखे नहीं है उन्होंने गढ़ा है तभी हम आज जीवित हैं। हवा भी ले रहे हैं और पानी भी पी रहे हैं। बर्थडे मनाना है तो होटल में लाखों खर्च कर देंगे, लेकिन एक पेड़ बचाना है ये नहीं समझते।

कुलिशजी कलम के योद्धा जिन्होंने जनसरोकारों को प्राथमिकता दी

पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा की पत्रिका समूह के संस्थापक कर्पूरचंद कुलिशजी की जन्मशती पर उन्हें स्मरण करते हुए उनके मूल्यों और विचारों को आज भी उतना ही प्रासंगिक बताया। कुलिशजी पत्रकारिता और साहित्य के ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने हमेशा जनसरोकारों को प्राथमिकता दी।

वे सच्चाई के पक्षधर थे और बिना किसी दबाव के जनता के सवालों को मुखरता से उठाते रहे। कुलिशजी के सिद्धांतों को आज की पत्रकारिता के लिए संजीवनी हैं। अगर मीडिया आज भी जनभावनाओं के साथ चलना चाहता है तो उसे कुलिशजी की राह पर चलना ही होगा।

नई पीढ़ी के मार्गदर्शक कुलिशजी

भारत की परंपराएं, विचार और मूल्यों की वह ताकत, जिसे कुलिशजी ने अपने लेखन और चिंतन में जिया, वह आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। आज पत्रिका की पहचान जहां कुलिशजी की विरासत है, वहीं वर्तमान को गुलाब कोठारीजी जैसे संपादकीय नेतृत्व ने नई दिशा दी है। वक्त है कि हम सब उस विचारधारा को संबल बनाएं जो केवल खबर नहीं, समाज को दिशा देने का कार्य करती है।