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संजीवनी कर्मियों ने पेश की मिसाल, प्रीमैच्योर शिशु को 60 किमी एम्बुबैग के सहारे सांस देकर पहुँचाया हॉस्पिटल

जांजगीर से बिलासपुर तक लगातार 60 किलोमीटर एम्बुबैग के माध्यम से सांस देता रहा। इसके पश्चात बच्चे को सुरक्षित सिम्स में एडमिट कराए। फिरहाल डॉकटरों द्वारा बच्चे कक इलाज किया जा रहा है।

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108 संजीवनी एक्सप्रेस की टीम ने फरिश्ते की भूमिका निभाते हुए दो दिन पूर्व हुए एक प्रीमैच्योर शिशु को एम्बुबैग देते हुए जिला अस्पताल जांजगीर से सिम्स पहुँचाया।

मिली जानकारी के अनुसार सक्ति जिले के अड़भार निवासी सुमन खूंटे उम्र 23 वर्ष को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने शासकीय अस्पताल सक्ति में एडमिट कराया था। महिला ने प्रीमैच्योर शिशु को जन्म दिया। बच्चे के लो बर्थ होने के चलते डॉक्टरों द्वारा उन्हें जांजगीर जिला अस्पताल रिफर कर दिया गया। यहां 7 दिसंबर को सुबह 4 बजे बच्चे की तबियत और बिगड़ने लगी। शिशु को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इसके पश्चात डॉक्टरों द्वारा बेहतर उपचार हेतु सिम्स बिलासपुर रिफर कर दिया गया और इसकी सूचना 108 को दी गई।

सूचना मिलते ही पायलट नीलकमल रात्रे और ईएमटी संजय कुमार सूर्यवंशी तुरन्त हॉस्पिटल पहुँचें। ईएमटी संजय सूर्यवंशी ने बताया कि इस दौरान बच्चे को सकुशल हॉस्पिटल पहुंचाना एक दोहरी चुनौती वाला काम था, क्योंकि बच्चा प्रीमैच्योर होने के साथ ही उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। इस दौरान मैंने ईरसीपी मे बात करके डाक्टर के अनुशार ऑक्सीजन कनेक्ट किया और जांजगीर से बिलासपुर तक लगातार 60 किलोमीटर एम्बुबैग के माध्यम से सांस देता रहा। इसके पश्चात बच्चे को सुरक्षित सिम्स में एडमिट कराए। फिरहाल डॉकटरों द्वारा बच्चे कक इलाज किया जा रहा है।

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