छत्तीसगढ़ राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों को आधार बनाकर यह तुलनात्मक अध्ययन किया गया है सरकारी अस्पताल में इलाज कराने का औसत खर्च 2833 रुपए है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में ये खर्च औसतन 6788 रुपए है
नई दिल्ली/रायपुर. देश में स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त अव्यवस्था आमजन के लिए मुसीबत बनती जा रही है। सबसे गंभीर समस्या गलत इलाज और मनमानी वसूली की है। एक तो लोगों को सही इलाज नहीं मिल रहा, दूसरा लोगों की जिंदगीभर की कमाई बीमारी से लडऩे में चली जा रही है। निजी अस्पतालों के गोलमाल के आगे लोगों का बुरा हाल हो रहा है। वहीं, निजी अस्पताल नोट छापने की मशीन बन गए हैं। यह बात एक शोध में सामने आई है।
आपको बताते चले कि हालही में आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने भारत के सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार के खर्चे का तुलनात्मक अध्ययन किया है। शोध के परिणाम बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों में कुल खर्च बहुत अधिक होता है जो सरकार और मरीज के परिवार दोनों पर बड़ा बोझ है। यह तुलनात्मक अध्ययन छत्तीसगढ़ राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों को आधार बना कर किया गया है। आईआईटी जोधपुर में स्कूल ऑफ लिबरल आट्र्स के सहायक प्रोफेसर डॉ. आलोक रंजन ने यह शोध डॉ. समीर गर्ग, नारायण त्रिपाठी और कीर्ति कुमार के साथ मिलकर किया है।