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Public News: आलू को तेल में फ्राई करने से बढ़ता है फैट

आलू एक संपूर्ण आहार है। आलू को लेकर भ्रांतियां फैली हैं जो गलत है। आलू में वो सब कुछ है जो व्यक्ति को जिंदा और स्वस्थ्य रखने के लिए पर्याप्त है। आलू में 80 फीसदी पानी है। हमारी गड़बड़ी यह है कि हमारे देश में जो आलू की रेसिपी बनाई गई वो तेल से थी। […]

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Public News: आलू को तेल में फ्राई करने से बढ़ता है फैट

Public News: आलू को तेल में फ्राई करने से बढ़ता है फैट

आलू एक संपूर्ण आहार है। आलू को लेकर भ्रांतियां फैली हैं जो गलत है। आलू में वो सब कुछ है जो व्यक्ति को जिंदा और स्वस्थ्य रखने के लिए पर्याप्त है। आलू में 80 फीसदी पानी है। हमारी गड़बड़ी यह है कि हमारे देश में जो आलू की रेसिपी बनाई गई वो तेल से थी। आलू को फ्राई करने के लिए तेल, घी का उपयोग किया जाता है। लेकिन आलू में तेल सोखने की क्षमता होती है। फ्राई करते है तो पानी निकल जाता है और तेल आलू में सोख जाता है। जिससे फाइनल प्रोडक्ट जो बचता है उसमें फैट कंटेट बढ़ जाता है। उसी को मोटापा से जोड़ा जाता है। जबकि आलू में 0.8 फीसदी फैट होता है। यह बात कही आईसीएआर-सेंट्रल पोटेटो रिसर्च इंस्टटीट्यूट (सीपीआरआई) शिमला के निदेशक डॉ. बृजेश सिंह ने। वे आलू अनुसंधान परियोजना की मानिटरिंग के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पहुंचे।

प्रति व्यक्ति 350-100 किलो आलू का उपयोग

पत्रिका के साथ खास बातचीत में उन्होंने बताया कि देश में आलू की खपत बहुत कम है। साल भर में प्रति व्यक्ति कई किलो आलू खा पाता है। रशिया, यूरोप के कई देश है जहां प्रति व्यक्ति 350-100 किलो आलू का उपयोग करते है और वो लोग काफी स्वस्थ भी है। आलू देश में लगभग 400 साल पहले ही आया लेकिन आज हम उत्पादन में विश्व में दूसरे नंबर पर हैं।

देश में आलू का उत्पादन 2047 तक 90 मिलियन मीट्रिक टन

उन्होंने बताया कि इंस्टीट्यूट से अब तक देश को आलू की 76 वैराइटी दे चुके हैं। हम प्रति यूनिट उत्पादकता में चाइना से बहुत आगे हैं। देश में 60 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादकता है। जो हेक्टेयर 25 टन है। हम 2047 में अमृत काल मनाने का सोच रहे हैं। उस समय तक देश में आलू 90 मिलियन मीट्रिक टन आलू उत्पादन करें।

राज्य में क्वालिटी बीज की कमी

छत्तीसगढ़ राज्य में आलू को लेकर अच्छी संभावनाएं हैं। क्लाइमेंट भी आलू के लिए अच्छा है। थोड़ी सी दिक्कत यह है कि अच्छा क्वालिटी का बीज आना चाहिए, वो नहीं आया है। छत्तीसगढ़ के किसानों को अच्छी क्वालिटी का बीज मिलेगा तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन से ज्यादा पैदावार बढ़ेगी। उत्तरप्रदेश, पंजाब, गुजरात जैसे राज्यों में आलू में काफी अच्छा काम चल रहा है। छत्तीसगढ़ में धान की तरह ही आलू की खेती की जा सकती है।

आलू में न्यूट्रिशन

आलू से स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं होता है। ये केवल भ्रांति है। हमने कुफरी नीलकंठ तैयार किया है। इस आलू की प्रजाति में एंट्री ऑक्सीडेंट ज्यादा है। इसमें नार्मल आलू से ज्यादा न्यूट्रीशन ज्यादा मिलता है। इसमें कई बीमारी के लिए रोग प्रतिरोधक भी है।