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श्रोताओं की बातें सुन रेडियो सिलोन के एनाउंसर की भर आईं आंखें

राजधानी में जुटे श्रोताओं ने सुनाएं अनुभव

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श्रोताओं की बातें सुन रेडियो सिलोन के एनाउंसर की भर आईं आंखें

वृंदावन हॉल में रेडियो दिवस पर छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों से भी श्रोता पहुंचे।

ताबीर हुसैन @ रायपुर. भाटापारा के श्रोता हरमिंदर चावला ने जब 40 साल पहले रेडियो सिलोन के कार्यक्रम में कही गई बात याद दिलाई तो रेडियो सिलोन के पूर्व उद्घोषक रिपुसूदन कुमार एलावादी भावुक हो गए। वे मंच पर ही कहने लगे कि 4 दशक पहले की बात तो सगा भाई भी याद नहीं रखता, ऐसे में आप लोगों की जर्रानवाजी का मैं कायल हूं, ये कहते हुए उनकी आंखें भर आईं। इसे देखकर अन्य श्रोता भी जज्बाती हो गए। भावनाओं का यह ज्वर उमड़ रहा था वृंदावन हॉल में। यहां वल्र्ड रेडियो दिवस पर श्रोता सम्मेलन का आयोजन रखा गया था। छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ के कार्यक्रम में रेडियो सिलोन के एक्स एनाउंसर मनोहर महाजन और रिपुसूदन एलावादी सेंटर ऑफ अट्रेक्शन रहे। रिपुसूदन ने बताया कि श्रीलंका में काम करना इतना आसान नहीं था। वहां खानपान की दिक्कतें तो थी हीं 1980 के दशक में तमिल विरोधी ताकतें भी परेशान करती थीं। कार्यक्रम में आकाशवाणी के सहायक केंद्र निदेशक एलएल भौर्य, दूरदर्शन की बुलेटिनिस्ट रेहाना तबस्सुम, अशोक बजाज, परसराम साहू, सुरेश सरवैया, विनोद वंडलकर, मास्टर एसके पाटिल, सुजाता शुक्ला, मुरली क्षत्रिय खान, नीलू मेघ, कमलकांत गुप्ता, दिनेश जांगड़े, ईश्वरी प्रसाद साहू, कमल लाखानी, मनोहर डेंगवानी, सीएल यादव, अशोक श्याम कुंवर, के अलावा बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

'हफ्ते के श्रोता' के जरिए हो गई शादी

महाजन ने बताया कि मैं एक प्रोग्राम किया करता था हफ्ते के श्रोता। इसमें आधे घंटे तक किसी एक श्रोता की पूरी जानकारी रोचक अंदाज में पढ़ी जाती थी। उस श्रोता के साथ ही उसके शहर की खासियत इसमें बयां की जाती थी। एक श्रोता की जानकारी मैंने प्रोगाम में पढ़ी। इसमें एड्रेस भी प्रसारित होता था। इसे सुनकर दूसरे शहर की लड़की ने उसे खत भेजा। खतों का सिलसिला मोहब्बत में कब तब्दील हुआ वे भी नहीं जानते। दोनों ने एक साथ रहने का फैसला किया और वे वैवाहिक बंधन में बंध गए। इसी तरह राजनांदगांव के जीवरामभाई राठौड़ का रिश्ता तय हुआ।

यादें मेरे दौर की विमोचित
महाजन की दूसरी किताब यादें मेरे दौर की का विमोचन किया गया। इसमें महाजन ने रेडियो पर फिल्मी दुनिया की तमाम हस्तियों के संस्मरण लिखे हैं। अमरीश पुरी से उनके एनकाउंटर यानी झड़प का जिक्र है तो मो. रफी की के साथ हुए साक्षात्कार के दौरान की बातें साझा की गई हैं।