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रायपुर : छत्तीसगढ़ी भाषा बोली में हृदय को छू लेने वाली मिठास: उइके

कार्यक्रम में जागेश्वर प्रसाद को उनकी छत्तीसगढ़ी भाषा में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में दिव्यांग छात्राओं द्वारा राजगीत 'अरपा पैरी के धारÓ और बालिका आरू साहू और लक्ष्मी कलिहारे द्वारा छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर नंदकिशोर शुक्ल एवं छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के सचिव जे. आर. भगत सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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रायपुर : छत्तीसगढ़ी भाषा बोली में हृदय को छू लेने वाली मिठास: उइके

रायपुर : छत्तीसगढ़ी भाषा बोली में हृदय को छू लेने वाली मिठास: उइके

रायपुर.छत्तीसगढ़ी भाषा, बोली और गीत में इतनी मिठास है कि यह हृदय को छू लेती है। यहां के लोगों में इतनी सरलता और सहजता है कि जब कोई व्यक्ति या जन समूह मुझसे क्षण भर के लिए मिलता है, तो ऐसा लगता है कि उनसे जन्मों से संबंध है। यह बात राज्यपाल अनुसुईया उइके ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर कहा। कायज़्क्रम में राज्यपाल को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहने पहनाकर और साड़ी भेंट कर सम्मानित किया गया।
राज्यपाल उइके ने कहा कि मुझे राज्यपाल पद का दायित्व लिए करीब चार महीने हो रहे हैं। इस दौरान चार-पांच हजार लोगों से भी अधिक लोगों से मेरी मुलाकात हुई है। साथ ही कुछ जिलों में जाने का मौका भी मिला। मुझे सबसे ज्यादा खुशी मुझपर आमजनों का विश्वास को देखकर होती है। उन्होंने कहा कि गत दिवस गवर्नर्स कांफ्रेंस में छत्तीसगढ़ी भाषा से संबंधित बातें रखी थी और छत्तीसगढ़ी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए राष्ट्रपति केन्द्र सरकार के समक्ष आवश्यक प्रयास करूंगी। साथ ही इस मंच से संस्था के सदस्यों द्वारा इस भाषा के प्रोत्साहन के लिए जो आग्रह किया गया है, उसे राज्य सरकार तक पहुंचाऊंगी।

अधिक से अधिक छत्तीसगढ़ का उपयोग करें
राज्यपाल उइके ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बोली भाषा से अपने संतानों को भी अवगत कराना चाहिए और यथा संभव अपने परिवार में उनका उपयोग करना चाहिए, जिससे की पुरानी बोली-भाषाएं एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी को हस्तांतरित होती रहें और उनका अस्तित्व बचा रहे। राज्यपाल ने प्रदेश में छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के गठन और आयोग द्वारा शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रशिक्षण देने पर खुशी भी जताई। इस अवसर पर साहित्यकार परदेशीलाल वर्मां, बिहारीलाल साहू ने भी अपना संबोधन दिया।