
रायपुर में मलेरियामुक्त की ओर (Photo Patrika)
CG News: @पीलूराम साहू। बस्तर समेत प्रदेश के दूसरे जिलों में पिछले तीन वर्षों में मलेरिया के 5 हजार से ज्यादा केस मिल चुके हैं, लेकिन राजधानी में मरीजों की संख्या शून्य है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अगले एक-दो साल में मलेरिया के मरीज नहीं मिलने पर डब्ल्यूएचओ राजधानी समेत रायपुर जिले को मलेरियामुक्त घोषित करने वाला है। हालांकि यह चौंकाने वाला है, क्योंकि रायपुर में भी मलेरिया के केस आते हैं। नियमों के फेर में मरीजों को रायपुर का नहीं माना जाता।
अभी बारिश का सीजन है और राजधानी का ऐसा कोई वार्ड नहीं है, जहां मच्छर न हो। मच्छर बढ़ने के बाद भी फॉगिंग नहीं होने का मामला हाल ही में विधानसभा में उठ चुका है। रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने अपने विस क्षेत्र में फॉगिंग नहीं होने का मामला उठाया था। रायपुर जिले की आबादी 27 लाख के आसपास है।
इसमें मलेरिया का कोई केस नहीं मिलना चौंकाता है। दरअसल, मलेरिया के मरीज होने के लिए ही शर्त ही ऐसी है कि इसके आंकड़ों में हेरफेर करना मुश्किल नहीं है। प्रदेश में मलेरिया के मामले में बस्तर संभाग अतिसंवेदनशील है। बीजापुर, दंतेवाड़ा व नारायणपुर में प्रदेश के 62 फीसदी मरीज मिलते हैं। इंटरनेशनल जर्नल लैंसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी दुनिया में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल मौसम बन रहा है।
मच्छरों की प्रजनन दर के साथ उनके काटने की दर में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले 3 वर्षों से रायपुर जिले में मलेरिया के केस शून्य है। ऐसी ही स्थिति रही तो विश्व स्वास्थ्य संगठन जिले को मलेरियामुक्त करने वाला है। रायपुर में आर्मेजर मच्छर मिलते हैं, जिससे मलेरिया नहीं फैलता।
-डॉ. विमल किशोर राय,जिला मलेरिया अधिकारी रायपुर
रायपुर के स्लम व खुले एरिया से अक्सर मलेरिया के मरीज आते हैं। जहां कैंप एरिया है, वहां से भी मरीज आते हैं। जुलाई से सितंबर तक मच्छर काफी बढ़ जाते हैं। ऐसे में मलेरिया के मरीज आना स्वाभाविक है।
-डॉ. अनिमेष चौधरी,एमडी मेडिसिन, निजी अस्पताल
Published on:
25 Jul 2025 09:14 am
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