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Raipur News: एनएमसी ने इन 13 मेडिकल कॉलेजों को जारी किया नोटिस, सामने आई यह बड़ी वजह

Raipur News: नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने बायोमैट्रिक सिस्टम में फैकल्टी के अटेंडेंस न लगाने को गंभीरता से लिया है। कमीशन ने प्रदेश के सभी 13 मेडिकल कॉलेजों को नोटिस भेजकर पूछा है कि फैकल्टी बायोमैट्रिक अटेंडेंस क्यों नहीं लगा रहे हैं? आपने जितनी फैकल्टी बताई है, उतनी हाजिरी नहीं लग रही है।

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Chhattisgarh News: रायपुर पत्रिका @पीलूराम साहू। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने बायोमैट्रिक सिस्टम में फैकल्टी के अटेंडेंस न लगाने को गंभीरता से लिया है। कमीशन ने प्रदेश के सभी 13 मेडिकल कॉलेजों को नोटिस भेजकर पूछा है कि फैकल्टी बायोमैट्रिक अटेंडेंस क्यों नहीं लगा रहे हैं? आपने जितनी फैकल्टी बताई है, उतनी हाजिरी नहीं लग रही है। क्यों न इसके लिए कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाए? एनएमसी के नोटिस के बाद कॉलेज प्रबंधन जहां हड़बड़ा गए हैं, वहीं प्रदेश के सबसे पुराने व बड़े नेहरू मेडिकल कॉलेज ने नोटिस का जवाब ही नहीं दिया। इसके बाद एनएमसी ने फिर से नोटिस जारी किया है। प्रदेश में 10 सरकारी व 3 निजी मेडिकल कॉलेजों का संचालन किया जा रहा है। इन कॉलेजों में एमबीबीएस की 1910 सीटें हैं।

बायोमैट्रिक अटेंडेंस है अनिवार्य

एनएमसी ने अब बायोमीट्रिक सिस्टम से अटेंडेंस को अनिवार्य किया है। इसके बाद भी कॉलेज प्रबंधन गंभीर नहीं है। कमीशन ने सभी कॉलेजों को 15 दिनों में जवाब देने का समय दिया था। यह मियाद पूरी हो गई है। नेहरू मेडिकल कॉलेज में बाकी कॉलेजों की तुलना में फैकल्टी की स्थिति अच्छी है। इसके बावजूद अटेंडेंस नहीं लगने से नोटिस का सामना करना पड़ गया। नवंबर में एनएमसी ने कांकेर, महासमुंद व रायगढ़ को नोटिस देकर फैकल्टी की कमी पर चेतावनी दी थी। कॉलेजों ने पिछले साल दिसंबर में नोटिस का जवाब भेज दिया था। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि कोरबा, दुर्ग, जगदलपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर व निजी कॉलेजों में भी फैकल्टी की कमी है।

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न प्रोफेसर, न ही बाकी फैकल्टी की व्यवस्था

रायगढ़ कॉलेज को खुले 10 साल से ज्यादा हो गए हैं। वहीं कांकेर को तीन साल व महासमुंद में मेडिकल कॉलेज को चालू हुए दो साल हुए हैं। इन कॉलेजों में फैकल्टी की कमी तो है। एनएमसी के मापदंड के अनुसार न प्रोफेसर है और न ही एसोसिएट प्रोफेसर। असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी भी बनी हुई है। इन कॉलेजों में फैकल्टी की कमी कैसे दूर होगी, यह सोचने वाली बात है। रायपुर मेडिकल कॉलेज में कई सीनियर डॉक्टर 20 से 22 साल से जमे हुए हैं। मान्यता पर खतरा होते देख इन डॉक्टरों को नए कॉलेजों में ट्रांसफर किया जा सकता है। प्रदेश में संविदा डॉक्टरों को 95 हजार से 2.40 लाख रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है। कांकेर, जगदलपुर व कोरबा कॉलेज अनुसूचित क्षेत्र में है। इसलिए वहां डॉक्टरों का वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया है। हालांकि इसे अभी स्वीकृत नहीं मिली है।

मेडिकल कॉलेजों में पद इस तरह रिक्त

पद - स्वीकृत - रिक्त
प्रोफेसर - 235 - 111
एसो. प्रोफेसर - 395 - 183
असि. प्रोफेसर - 556 - 338
सीनियर रेजिडेंट - 402 - 286
डेमोंस्ट्रेटर - 301 - 122

सभी कॉलेजों के डीन को बताया गया है कि बायोमैट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य है। इसके बाद भी ऑनलाइन अटेंडेंस पर उदासीनता ठीक नहीं है। एनएमसी ने कॉलेजों को इन्हीें कारणों से नोटिस दिया गया है। - डॉ. विष्णु दत्त, डीएमई

कुछ डॉक्टर बायोमीट्रिक अटेंडेंस लगाने में चूक गए है। पहले से ही यहां बायोमैट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था की गई है। यह अनिवार्य है। कॉलेज में एनएमसी के मापदंड के अनुसार पर्याप्त फैकल्टी है। - डॉ. देवेंद्र नायक, चेयरमैन बालाजी मेडिकल कॉलेज

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