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Raipur News: बड़े बकाएदारों की हो गई बल्ले-बल्ले! रायपुर निगम राजस्व वसूली में 50 करोड़ पीछे

Raipur News: राज्य शासन के एक महीने का अतिरिक्त समय देने के बावजूद भी निगम प्रशासन संपत्तिकर जमा कराने के मामले में अभी 50 करोड़ से पीछे है..

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raipur nagar nigam Property Tax

Raipur Property Tax: नगर निगम पूरा टैक्स वसूलने में हॉफ गया। न तो लाखों रुपए दबाकर बैठे बड़े बकायेदारों पर शिकंजा कस पाया और न ही खुद के द्वारा तय लक्ष्य हासिल कर पाया है। राज्य शासन के एक महीने का अतिरिक्त समय देने के बावजूद भी निगम प्रशासन संपत्तिकर जमा कराने के मामले में अभी 50 करोड़ से पीछे है। जबकि नगर निवेशक विभाग अपने टारगेट के करीब पहुंचा है।

Raipur Property Tax: अभी भी करोड़ों रुपए बकाया

वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए निगम प्रशासन ने 350 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था, लेकिन काफी राहत-रियायतों के बाद 300 करोड़ रुपए हासिल कर सका। अभी करोड़ों रुपए बकाया है। यही वजह है कि छोटे-मोटे कामों के लिए निगम प्रशासन को राज्य सरकार के ऊपर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है। अपने राजस्व से एक निश्चित तय समय पर हर स्तर के कर्मचारियों को वेतन भुगतान करने के मामले में भी पीछे है। स्वच्छता दीदियों को तो कई बार 5 से 6 महीने में एक बार भुगतान करने की नौबत का भी सामना करना पड़ता है।

यह भी पढ़ें: Raipur News: प्रॉपर्टी खरीदने वालों को सरचार्ज में छूट का बड़ा ऐलान, निरस्त फ्लैट्स होंगे बहाल, RDA की बैठक में हुआ फैसला

राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया

नगर निगम क्षेत्र में प्रॉपर्टी टैक्स (Raipur Property Tax) के मूल्यांकन में भी बड़ा लोचा है। जोनों के राजस्व अमलों की मिलीभगत से कॉलोनियों, मोहल्ले और व्यावसायिक क्षेत्रों के भूंखड़ों के अनुपात से जितना राजस्व मिलना चाहिए, उतना नहीं मिल रहा है। जीआईएस कंपनी के सर्वे पर ही पूरी तरह से निगम प्रशासन निर्भर हो चुका है।

जमीनी स्तर पर हर जोन की प्रमुख सड़कों के निजी और नजूल (सरकारी) जमीन में बड़े-बड़े आवासीय भूखंडों में एकाक हिस्से का उपयोग रहवासी के रूप में करके लोग मामूली टैक्स जमा करने की खानापूर्ति लंबे अर्से से कर रहे हैं। ऐसी जगहों की कभी नापजोख कराकर निगम प्रशासन ने प्रॉपर्टी टैक्स तय नहीं किया। जबकि इससे हर साल लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

Raipur News: पट्टा राजीव गांधी आश्रय योजना का, कॉप्लेक्स बड़े-बड़े

पुरानी धमतरी रोड का बड़ा उदाहरण है। यह क्षेत्र 2004 में नगर निगम में शामिल हुआ। परंतु इससे पहले इस सड़क की दोनों तरफ की सैकड़ों एकड़ नजूल जमीन का किसी को 900 तो किसी को 1400 वर्गफीट के हिसाब से राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत पट्टा मिला था, परंतु लोगों ने दो से तीन हजार वर्गफीट तक घेरा थे।

पिछले 20 सालों के दौरान इस रोड की दोनों तरफ बड़े-बड़े व्यावसायिक कॉलेक्स, दुकानें बन चुकी हैं, लेकिन प्रॉपर्टी टैक्स का आंकड़ा जोन कार्यालय में नाममात्र का है। क्योंकि संतोषीनगर अंडरब्रिज से लेकर भैरव नगर तक कभी जमीनी स्तर पर नापजोख ही नहीं कराई गई। ऐसा ही हाल सिद्धार्थ चौक से संतोषीनगर चौक तक है। ऐसी जगह का यदि जमीन स्तर पर सर्वे कराकर प्रॉपर्टी टैक्स का मूल्यांकन निगम तय करता है तो लाखों नहीं करोड़ों रुपए राजस्व निगम के खजाने में आ सकते हैं।

मामले में किसी तरह की कोताही नहीं

उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा ने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने के लिए लगातार अभियान चलाया गया है। इस मामले में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है। सभी जोनों को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया गया है। जहां विसंगतियां हैं, उसका सर्वे कराकर नए सिरे से प्रॉपर्टी टैक्स तय किया जाएगा।


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