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रायपुर के 700 से अधिक कोचिंग सेंटरों में फायर ऑडिट नहीं, लखनऊ हादसे के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल

Fire Safety in Coaching Centers: लखनऊ हादसे के बाद रायपुर के कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में सामने आया है कि शहर के 700 से अधिक कोचिंग सेंटरों में फायर ऑडिट नहीं कराया गया है...
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Fire Audit of Coaching Centers

कोचिंग सेंटरों में फायर ऑडिट नहीं (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@अजय रघुवंशी। Fire Safety Audit: राजधानी में कोचिंग सेंटरों के काले कारनामे इस तरह है कि लाखों की फीस, लेकिन सुरक्षा के नाम पर छात्रों की जान से खिलवाड़। लखनऊ में आग लगने की घटना के बाद नगर-निगम ने मंगलवार को जांच समिति गठित कर दी। टीम निकली और खामियां पाई, लेकिन सवाल यह है कि यह जांच सिर्फ हादसों के बाद क्यों। हर बार की तरह इस बार भी खाानपूर्ति।

पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि शहर में 700 से अधिक कोचिंग सेंटर केवल गुमास्ता लाइसेंस के आधार पर संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश संस्थानों में फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया गया है। कई कोचिंग सेंटर संकरी गलियों में चल रहे हैं, जहां एक कमरे में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाया जा रहा है। पीने के पानी, शौचालय, आपातकालीन निकास और अग्निशमन उपकरण जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

यहां कई सेंटरों में खामियां उजागर

जिला प्रशासन के आदेश का हवाला देते हुए निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने निरीक्षण दल गठित किया है। टीम के निरीक्षण के दौरान एलन, अनअकादमी एवं विद्यापीठ में कक्षाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों के बैठने तथा वेंटिलेशन संबंधी कमियां पाई गईं। वहीं, अकादजा एवं आरसीसी में फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन, प्रवेश एवं निकास व्यवस्था सहित विभिन्न सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं। संबंधित संस्थानों के संचालकों को एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था दुरुस्त करने निर्देशित किया गया है। नगर निवेशक आभाष मिश्रा इस पूरी जांच की मॉनिटरिंग करेंगे।

कॉम्पलेक्स के ऊपर कोचिंग सेंटर, एक ही रास्ता

पत्रिका ने पड़ताल में पाया कि राजधानी के जीई रोड में कई छोटे-बड़ें कोचिंग सेंटर्स संचालित हो रहे हैं। आमानाका से जैसे साइंस कॉलेज होते हुए आगे बढ़ते हैं कई सेंटर्स दिखाई दे जाते हैं। अनुपम गार्डन के सामने स्थित कॉम्प्लेक्स में दो कोचिंग सेंटर्स हैं। इनके प्रवेश द्वार एक ही हैं। आगे जाने पर पेट्रोल पंप के आगे भी दो कोचिंग सेंटर्स हैं। जहां का प्रवेश द्वारा काफी संकरा है।

साथ ही यहां फायर सेफ्टी को लेकर भी व्यवस्था नहीं है। जयस्तंभ चौक, सिविल लाइन, लाखेनगर, संतोषी नगर, सुंदर नगर, शंकर नगर, कचना, विधानसभा रोड, सड्डू-मोवा, पंडरी, फाफाडीह, देवेंद्र नगर, खमतराई आदि क्षेत्रों में भी यही स्थिति देखी गई।

गेमिंग जोन की फाइल बंद

गुजरात के गेमिंग जोन की आगजनी घटना से देशभर में हडक़ंप मचा और जिला और निगम प्रशासन ने टीमें गठित कर जांच कराने और खामियों पर कार्रवाई की दुहाई दी थी। परंतु आज तक ऐसी कोई कार्रवाई सामने नहीं आई। यहां तक तत्कालीन निगम आयुक्त अबिनाश मिश्रा के तबादले के बाद उस जांच की फाइल जोनों में बस्ताबंद कर दी गई।

गुजरात में आग की घटना होने के बाद यहां कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए कमेटी बनाई गई थीं। वे जांच में गए थे, रिपोर्ट में क्या आया था इतना याद नहीं है। पर कुछ जगह सेफ्टी समेत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कमी पाई गई थी। जिसको सुधारने कहा गया था, अभी फिर से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. गौरव सिंह कलेक्टर, रायपुर

सुरक्षा मानकों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

निगम क्षेत्र के सभी संस्थान और सेंटरों की जांच करने में टीम लगा दी गई है। जहां-जहां नियमों का उल्लंघन और मानकों का पालन नहीं करने की रिपोर्ट आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे संस्थान को सील कर दिया जाएगा। - संबित मिश्रा, कमिश्नर नगर- निगम, रायपुर

गुमाश्ता लाइसेंस लेकर कई कोचिंग सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। यहां फायर ऑडिट की खामियां दूर नहीं की जा रही हैं। निगम से गुमाश्ता लाइसेंस जारी करने की संख्या की जानकारी नहीं दी जा रही है। - पुष्पराज सिंह फायर ऑफिसर, अग्निशमन एवं आपातकालानी सेवाएं, रायपुर