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हक के लिए सड़क पर उतरा बंगाली समाज, आज करेंगे विधानसभा का घेराव

पंखाजूर को जिला का बनाने और बंगाली समाज की विभिन्न जातियों को अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने सहित चार सूत्रीय मांग को लेकर बंगाली समाज ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है

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Chandu Nirmalkar

Dec 21, 2015

Bengali society

Bengali society

रायपुर.
पंखाजूर को जिला का बनाने और बंगाली समाज की विभिन्न जातियों को अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने सहित चार सूत्रीय मांग को लेकर बंगाली समाज ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंखाजूर और आसपास के इलाकों से बंगाली समाज के लोगों रविवार को राजधानी पहुंचकर एक दिवसीय धरना दिया। इस दौरान समाज के लोगों ने मांग पूरी नहीं होने पर समाज प्रमुखों से सोमवार को विधानसभा घेराव की चेतावनी दी है।


जमीन का मांगा मालिकाना हक

समाज ने भूमि का संपूर्ण मालिकाना हक के साथ ही भूमि क्रय-विक्रय का स्वतंत्र अधिकार भी मांगा है। इसके अलावा बंगाली समुदाय के छात्रों को मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा का मौलिक अधिकार और कक्षा १२वीं तक बंगला भाषा को एक अनिवार्य भाषा का दर्जा देने की भी मांग रखी है।


कांग्रेस का समर्थन

नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने धरना स्थल पर पहुंचकर आन्दोलन का समर्थन किया और बंगाली समाज के को इस मामले को विधानसभा में उठाने का आश्वासन भी दिया।


दूसरे राज्यों में मिला हक, यहां इंतजार

निखिल भारत उदवास्तु समन्वय समिति के बैनर तले पंखाजूर से माना पहुंचे। माना से पदयात्रा करते हुए बूढ़ा तालाब स्थिति धरना स्थल पर पहुंचकर समाज के लोगों ने सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जताई। समाज की मांग है कि छत्तीसगढ़ में निवासरत बंगाली नमो:शुद्र, पौण्ड्र एवं राजवंशी समुदाय को अनुसूचित जाति और समुदाय के वैश्य, कपाली, नाई, लोहार, तेली, जुलाहा, कुम्हार, सुरी, ग्वाला, धोबी, कैवर्त आदि अन्य जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग में मान्यता दी जाए।


समाज के प्रदेश अध्यक्ष असीम राय व सचिव मनोज कुमार मंडल ने बताया कि देश के आठ राज्यों में इन जाति को मान्यता दी गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार हमारा हक देने में आना-कानी कर रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र लिखकर इस संबंध में स्पष्ट मंशा जाहिर करने को कहा है, लेकिन प्रदेश सरकार इस पत्र का जवाब नहीं दे रही है।