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रंगभूमि रायपुर ने दी कविताओं की भावपूर्ण प्रस्तुति

दर्शकों ने खूब सराहा  

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रायपुर. छत्तीसगढ़ की संस्था रंगभूमि रायपुर ने 'निज भाषा उन्नति अहै' के तहत छत्तीसगढ़ के राज्यगीत अरपा पैरी के धार (डॉ. नरेंद्र देव वर्मा) के साथ कविताओं मेरे नगपति (रामधारी सिंह दिनकर), चिडिय़ा कहां रहेगी, नीर भरी दुख की बदली (महादेवी वर्मा), गेहूं और गुलाब (रामवृक्ष बेनीपुरी), दुनिया साफ करने मेहतर चाहिए, नाश देवता (गजानन माधव मुक्तिबोध), मृत्युंजय, फूल की चाह (सियारामशरण गुप्त), भगत सिंह (श्रीकृष्ण सरल) और एक कबूतर चिट्ठी लेकर, हो गई है पीर, फिर जन्म लूंगा (दुष्यंत कुमार) की रंगमंचीय प्रस्तुति राजधानी के सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में दी। आचार्य रंजन मोडक के निर्देशन में आयुष राजवैद्य, नीरज सिंह ठाकुर, दीप्ति त्यागी, लोकेश साहू, नीतीश यादव, सुमन आरोही, अदीबा कुरैशी, चैतन्य मोडक, आकाश वर्थी, निधि त्रिपाठी, भिवनेश्वरी ओझा, लाईशा एन. जैकब, सुषमा गायकवाड़, मीमांसा शर्मा, ओमप्रकाश मानिकपुरी, मनीष पदमावार, श्रीयश श्याम, देवेंद्र पसेरिया ने अपने अभिनय की धाक छोड़ी। नाट्य प्रस्तुतियों में संगीत तिलक भोगल ने दिया और सूत्रधार डॉ. विभाषा मिश्र थीं। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माता-निर्देशक संतोष जैन, छत्तीसगढ़ी लोक संगीतज्ञ राकेश तिवारी, रंग निदेशक डॉ. कुंजबिहारी शर्मा, भाषाविद् डॉ. चितरंजन कर, कलाप्रेमी सुधा राजवैद्य, डॉ. देशपांडे, डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर, नरेंद्र यादव, विनिता राजवैद्य, प्रीति राजवैद्य, सुमीत मोडक, महाराष्ट्र मंडल रायपुर के रविंद्र थेंगड़ी व अभय भागवतकर, योग प्लाजा के विक्रमदीप साहू व दुलेश श्रीमाली सहित बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने प्रस्तुतियों को सराहा।   raipur, chhattisgarh, news, drama, play, poetry, theater

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