
विवाहिता से दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग करने वाले फर्जी पुलिस अफसर को ढूंढ नहीं पाई पुलिस, अग्रिम जमानत लेने पहुंचा कोर्ट
रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर है। खुद को पुलिस अफसर बताकर कई लोगों से धोखाधड़ी और विवाहिता से दुष्कर्म करने वाला पीयूष तिवारी अग्रिम जमानत लेने कोर्ट पहुंच गया, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई । साथ ही पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अभी तक एस्ट्रोसिटी एक्ट के तहत कोई कार्रवाई नहीं की है, जबकि पीड़िता ने दूसरे दिन ही पुलिस को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए थे। उल्लेखनीय है कि पीयूष के रिश्तेदार पुलिस विभाग में पदस्थ हैं। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक स्तर के एक अधिकारी से उनकी काफी नजदीकी है। इसके चलते पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही है।
चार दिन बाद ही दर्ज कराया फर्जी मामला
पीयूष काफी शातिर है। उसके खिलाफ नौकरी लगाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी के कई मामले दर्ज हैं। आरोपी ने पीडि़ता के पिता, पति व भाई के खिलाफ कुम्हारी थाने में धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कराया है। इससे मौदहापारा में पीडि़ता और उसके पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। कुम्हारी थाने में दर्ज हुई एफआईआर भी पुलिस अफसरों से मिलीभगत करके दर्ज कराई गई है। उल्लेखनीय है कि कुम्हारी मामले में आरोपी ने जिस दिन पीडि़ता और उसे रिश्तेदारों को 5 लाख रुपए देने का आरोप लगाया है, उसके चार दिन पहले ही वह जेल से छूटा है।
आरोपी पीयूष 11 अक्टूबर 2018 को सूरजपुर जेल से छूटा था। और कुम्हारी में दर्ज कराए एफआईआर के मुताबिक पीयूष ने जेल से छूटने के चार दिन बाद ही अर्थात् 15 अक्टूबर 2018 को पीडि़ता, उसके पिता, पति और भाई से बातचीत की है। और 5 लाख रुपए देने का आरोप लगाया था। इसी आधार पर पुलिस ने पीडि़ता और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ एफआईआर की है। सवाल यह उठता है कि आखिर जेल से छूटने के चार दिन बाद ही आरोपी के पास इतनी राशि कहां से आ गई और पीडि़ता व उसके परिवार वालों को इतनी जल्दी पैसा दे भी दिया।
वर्जन
आरोपी की तलाश की जा रही है। पीडि़ता के दस्तावेज मिले हैं। इसकी जांच के बाद अतिरिक्त धाराएं लगाई जा रही हैं।
आरके पात्रे, टीआई, कोतवाली, रायपुर
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Published on:
16 Jan 2020 10:16 pm
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