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विवादित जमीन: लीज होल्ड से फ्री होने के लिए RDA को देनी होगी मोटी रकम

योजना के अंर्तगत 30 वर्षों के लिए लीज पर ली गई जमीन, मकान को फ्री होल्ड करना है, साथ ही इसके लिए आवश्यक राशि भी चुकानी होगी

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RDA

विवादित जमीन: लीज होल्ड से फ्री होने के लिए RDA को देनी होगी मोटी रकम

रायपुर. राज्य सरकार ने लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के लिए प्राप्त आवेदनों को 30 दिनों के भीतर निराकरण का आदेश तो जारी कर दिया है, लेकिन छग हाउसिंग बोर्ड और रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की कई जमीनें ऐसी है, जो कि खुद उनके नाम पर ट्रांसफर नहीं हो पाई है, इसकी वजह से हितग्राहियों को इस योजना का लाभ सही समय पर नहीं मिल पा रहा है। योजना के अंर्तगत 30 वर्षों के लिए लीज पर ली गई जमीन, मकान को फ्री होल्ड करना है, साथ ही इसके लिए आवश्यक राशि भी चुकानी होगी।

नियमों के मुताबिक 600 वर्गफुट तक के जमीनों के संबंध में प्राप्त आवेदनों को नि:शुल्क फ्री होल्ड किया जाएगा, लेकिन इससे अधिक वर्गफीट की जमीनों पर नियमों के मुताबिक आवश्यक शुल्क लिया जाएगा। नियमों के मुताबिक फ्री होल्ड के लिए 10 वर्षों का भू-भाटक जमा करना होगा, वहीं जलकर, मलकर, सम्पत्तिकर भी चुकानी होगी।

इसके साथ ही संपरिवर्तन प्रभार शुल्क के रूप संबंधित क्षेत्र की जमीन की कीमत के मुताबिक 1.10 फीसदी कलक्टर गाइडलाइन दर के मुताबिक शुल्क अदा करना होगा। लीज होल्ड से फ्री होल्ड के मामले में आरडीए के सीईओ नरेंद्र शुक्ल ने कहा कि फ्री होल्ड के लिए प्राप्त आवेदनों को समय-सीमा के भीतर निराकरण के निर्देश दिए गए हैं। विवादित मामलों का निपटारा किया जा रहा है।

फार्मेट में नहीं आ रहे आवेदन
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के संबंध में हितग्राहियों के लिए एक फार्मेट जारी किया गया है, जिसके मुताबिक आवेदन नहीं आ रहे हैं। इस फार्मेट में हितग्राहियों को स्वयं का शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के साथ ही सभी बकाया राशि का भुगतान संबंधी प्रमाण-पत्र आदि प्रस्तुत करना है।

विवादित जमीन मामले में उलझा आरडीए
ऐसी जमीन जिसका नामांतरण विभाग के नाम पर नहीं हो सका है। ऐसी जमीनों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड नहीं किया जा सकेगा। आरडीए की कई ऐसी जमीनें हैं, जो कि विवादित है, जो कि आरडीए के नाम पर नहीं हो पाई है। ऐसे मामलों में हितग्राहियों को योजना का लाभ तभी मिलेगा, जब जमीनें आरडीए के नाम पर होगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में राजस्व भू-अभिलेख के अधिकारियों से बातचीत की जा रही है।