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Republic Day Special: देश का संविधान बनाने में छत्तीसगढ़ के इन विभूतियों का था बड़ा योगदान, जानिए उनके बारे में सब कुछ

Republic Day 2023: 26 जनवरी 1950 में भारतीय संविधान लागू किया गया था। जिसके बाद से हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

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Republic Day 2023: भारतीय संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। यह 26 जनवरी, 1950 में लागू हुआ था। हमारा संविधान विश्‍व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है। संविधान देश का सर्वोच्च कानून है और नागरिकों से इसका पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के लिए भारतीय संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। हमारा संविधान विश्‍व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है। गणतंत्र दिवस के मौके पर जानिए भारतीय संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देने छत्तीसगढ़ के इन विभूतियों के बारे में।

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भारतीय संविधान के निर्माण में छत्तीसगढ़ के कुछ विभूतियों का भी खास योगदान रहा।संविधान के निर्माण पर कुल 64 लाख रुपये का खर्च आया था और संविधान के बनने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था। संविधान दिवस के मौके पर ही जानते हैं कि आखिर संविधान बनाने में छत्तीसगढ़ के इन सपूतों ने कैसे अपना योगदान दिया...

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में 1946 में बनाई गई संविधान सभा में छह सदस्य छत्तीसगढ़ से थे। संविधान सभा के 299 सदस्य थे। किशोरीमोहन त्रिपाठी व रामप्रसाद पोटाई एवं मध्यप्रांत सीपी बरार (छत्तीसगढ़) के प्रतिनिधियों में रायपुर से पंडित रविशंकर शुक्ल, बालोद से बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल और दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्ता ने सभा के सदस्य के तौर पर बेहद अहम भूमिका निभाई।

घनश्याम सिंह गुप्त

संविधान सभा के सदस्य के तौर पर उन्होंने संविधान की हिंदी शब्दावली पर अहम योगदान दिया था। भारतीय संविधान का हिंदी में अनुवाद करने वाली समिति के अध्यक्ष दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्त थे। 1947 में अनुवाद समिति की पहली बैठक हुई। इसके बाद दूसरी बैठक में घनश्याम सिंह गुप्त को इस समिति का सर्वमान्य अध्यक्ष चुना गया।

पंडित रविशंकर शुक्ल

संविधान सभा के सदस्य मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे पंडित रविशंकर शुक्ल का जन्म सागर में हुआ था। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्ल ने विद्या मंदिर योजना चलाकर यहां कई विद्यालयों की स्थापना की थी। इनके नाम से रायपुर में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय संचालित है। सन् 1956 ई. तक वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। छत्तीसगढ़ की सभी चौदह रियासतों का मध्यप्रदेश में विलय कराने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल

बैरिस्टर छेदीलाल का जन्म बिलासपुर के अकलतरा में 1886 में हुआ था। वो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। बैरिस्टर छेदीलाल के नाम पर जांजगीर-चांपा जिले में महाविद्यालय संचालित है। बैरिस्टर छेदीलाल की हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत भाषा पर अच्छी पकड़ थी। बैरिस्टर छेदीलाल छत्तीसगढ़ राज्य के महान् शख्सियतों में एक हैं। बिलासपुर अंचल में जागृति फैलाने के लिए उन्होंने रामलीला के मंच से राष्ट्रीय रामायण का अभिनव प्रयोग किया।

रामप्रसाद पोटाई
रामप्रसाद पुताई छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की कन्हारपुरी गांव के रहने वाले थे। रामप्रसाद पोटाई को रियासत के प्रतिनिधि के तौर पर संविधान सभा का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए संविधान में आवाज उठाई। रामप्रसाद पोटाई ने डा भीमराव अम्बेडकर के साथ संविधान निर्माण में कदम से कदम मिलाते अहम योगदान दिया था।

पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी
भारतीय संविधान सभा के सदस्य रहे पंडित किशोर मोहन त्रिपाठी का ताल्लुक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से था। बाल श्रम को रोकने और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के अनुरूप पंचायती राज स्थापना जैसे विषयों को शामिल करने में पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी की अहम भूमिका रही। वे संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के भी सदस्य थे।

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