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RSS प्रमुख मोहन भागवत का छत्तीसगढ़ दौरा, जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में होंगे शामिल

RSS chief Mohan Bhagwat Chhattisgarh visit: ऐसे में जशपुर जैसे आदिवासी इलाके में भागवत का ये दौरा हिंदुत्व और धर्मांतरण की मुहिम को जोर दे सकता है। जिसका जाहिर तौर पर असर आगामी चुनावों के लिहाज से सियासी होगा। बता दें दिलीप सिंह इस इलाके में आदिवासियों की घर वापसी (क्रिश्चन बने आदिवासियों को हिंदू धर्म में वापसी) के लिए जाने जाते हैं। अब बेटे प्रबल प्रताप इस इलाके में यही काम कर रहे हैं।

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RSS प्रमुख मोहन भागवत का छत्तीसगढ़ दौरा, जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में होंगे शामिल

RSS प्रमुख मोहन भागवत

RSS chief Mohan Bhagwat Chhattisgarh visit: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव अगले साल है। केंद्रीय स्तर के नेता और भाजपा के कई बड़े पदाधिकारियों का प्रदेश में आना- जाना लगा हुआ है। कयास लगाए जा रहे है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत फिर से नवंबर में छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे। बता दें जशपुर में वन वासी कल्याण आश्रम की तरफ से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। भागवत 14 नवंबर को जशपुर और 15 नवंबर को अंबिकापुर में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। सबसे पहले 14 नवंबर को भागवत जशपुर में भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद 15 नवंबर को अंबिकापुर में संघ के बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे।

ज्ञात हो संघ प्रमुख मोहन भागवत 2 महीने पहले करीब सप्ताह भर रायपुर में ही रहकर संघ से जुड़े संगठनों की अहम बैठक की थी। इस बार जनजाति समाज के लोगों को संघ प्रमुख संबोधित करेंगे। इसके बाद अगले दिन अंबिकापुर के कार्यक्रम में संघ के स्वयं सेवकों का एकत्रीकरण का कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में भाजपा से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के भी शामिल होने की खबर है। इसी दिन देश में जनजातीय गौरव दिवस भी मनाया जाएगा।

अंबिकापुर में भागवत 15 नवंबर को रहेंगे। पिछले साल केंद्र की मोदी सरकार ने प्रतिष्ठित आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और नेता बिरसा मुंडा की जयंती पर आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के एक भाग के रूप में 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के समारोह के रूप में मनाने की स्वीकृति दी थी। संघ हमेशा से आदिवासी इलाकों में धर्म, संस्कृति और सेवा के कामों को लेकर एक्टिव रहा है। इस दिन छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी इलाके में रहकर संघ का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाना अहम है। इस दिन मंच से संघ प्रमुख देश के आदिवासियों के नाम अपना संदेश दे सकते हैं।

2013 में हुआ था एलान
दिलीप सिंह जूदेव के निधन के बाद साल 2013 में तत्कालीन मुख्य मंत्री डॉ. रमन सिंह ने जशपुर आकर उनकी प्रतिमा लगाए जाने का एलान किया था। प्रतिमा जशपुर और कुनकुरी में स्थापित होनी थी। चार साल बाद भी प्रतिमा स्थापित नहीं हुई तो विवाद शुरू हो गया। तब सरकार ने तकनीकी दिक्कत बताते हुए प्रतिमा स्थापित किए जाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ।