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सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना करने का फल अवश्य मिलता है

श्रीमद् भागवत महापुराण कथा : अजामिल चरि व प्रहलाद चरित्र कथा का प्रवचनकर्ता ने किया वर्णन

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सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना करने का फल अवश्य मिलता है

सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना करने का फल अवश्य मिलता है

कोरदा (लवन)। राधे-राधे महिला समूह के तत्वावधान में श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा नगर के हनुमान मंदिर में 24 दिसंबर से प्रारंभ है। भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित तोषण कृष्ण महाराज द्वारा अजामिल चरित्र व प्रहलाद चरित्र कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार की शिक्षा माता सुनीति ने अपने पुत्र ध्रुव को दी थी, जब प्रहलाद को उसके पिता हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु का नाम लेने से रोका तो वह नहीं माने। इसलिए भक्त प्रहलाद को विभिन्न प्रकार की यातना दी गई। अपने भक्त को बचाने के लिए खंभे में से नरसिंह अवतार लेकर भगवान ने पापी हिरण्यकश्यप का पेट फाड़़ डाला और अपने भक्त की रक्षा की।
उन्होंने बताया कि आप जिस प्रकार से ईश्वर की कामना करोगे, उसी प्रकार से ईश्वर भी आपकी रक्षा करने में लगेगा। इसलिए सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना करें और उसके फल की इच्छा न करें। भगवान का फल भले ही देर में मिले लेकिन सभी भक्तों को मिलता है। कथा सुनकर उपस्थित भक्तभाव विभोर हो गए।
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बारिश के बीच भागवत सुनने पहुंचकर गोसेवा अध्यक्ष
सेल। भारी बारिश के बाद भी श्रीमद् भागवगत कथा के दौरान ग्राम कटगी में श्रीकृष्ण जन्म उत्सव बहुत ही दिव्य भाव के साथ मनाया गया। आचार्य पंडित लक्ष्मीकांत ने बताया कि श्रीकृष्णजी को वसुदेवजी जब लेकर के गोकुल जाने लगे तब स्वयं बंधन खुलने लगे और जब गोकुल से योगमाया को लेकर आए तब स्वयं बंधन पुन: बंध गए। हम भगवान को जब तक हम पकड़े रहते हैं तब कोई भी बंधन और समस्या हमारे करीब नहीं होती जैसे ही हम भगवान को छोड़ कर के माया को पकड़ते हैं तो हम कई सांसारिक मोह में बंध जाते हैं। जो सत्य नहीं है वह है माया। श्री कृष्ण भगवान जब गर्भ में थे तब देवताओं ने सत्य सत्य सत्य का 9 बार उच्चारण करके स्तुति की, क्योंकि हमें अपने जीवन में सत्य को धारण करना चाहिए। सत्य को अपनाना चाहिए। भागवत कथा सुनने छत्तीसगढ़ गोसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास महाराज पहुंचे।