22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस भारतीय ने महज 50 हजार रुपए में तैयार किया सेटेलाइट, खूबियां देख वैज्ञानिक हुए हैरान

साद मेनन ने सात समुंदर पार बर्लिन के फ्लेमिंग बेस एयरपोर्ट में पानी से सैलेलाइट लांच कर इतिहास रच दिया है

2 min read
Google source verification
satellite

इस भारतीय ने महज 50 हजार रुपए में तैयार किया सेटेलाइट, खूबियां देख वैज्ञानिक हुए हैरान

जगदलपुर/रायपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर के युवा वैज्ञानिक साद मेनन ने सात समुंदर पार बर्लिन के फ्लेमिंग बेस एयरपोर्ट में पानी से सैलेलाइट लांच कर इतिहास रच दिया है। विश्व में एेसा पहली बार हुआ है कि कैन सैटेलाइट से मिनी सूपर कम्प्यूटर को जोड़ा गया हो। इतना ही नहीं इस सैटेलाइट की कीमत 50 हजार से भी कम की है।

साद मेनन ने बताया कि जर्मनी सरकार की एजेंसी डाडा ने यह का्रर्यक्रम आयोजित किया था। जिस में चल रहे सेटेलाइट डिजाइन कार्यक्रम में कोक की बोटल के आकार का सेटेलाइट लांच तैयार किया जाना था। कोक के कैन के भीतर इलेक्ट्रानिक डिवाइस तैयार किया गया। साथ ही इसमे फ्यूल के नाम पानी का प्रयोग किया गया था।

पानी के प्रेशर से इसे करीब 500 मीटर ऊंचाई तक भेजकर इसे लांच किया जाना था। इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी चुनौती सैटेलाइट को पैराशूट के जरिए नीचे उतारने की थी, ताकि सैटेलाइट को नुकसान न पहुंचे। पहली लांचिंग में फेल होने के बाद दूसरे बार में इसे कामयाबी से लांच किया गया।

शहर के आजाद चौक में रहने वाले चावल व्यापारी इश्तियाक मेमन के सबसे छोटे पुत्र मोहम्मद साद है। प्रारंभिक शिक्षा ओडिशा के कोडेंगा में करने के बाद वे जगदलपुर में उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद पुणे के डीवाई पाटिल कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

युवा वैज्ञानिक साद ने बताया कि वे आयरलैंड, यूके व फ्रांस में डबल मास्टर डिग्री ले रहे हैं। इसकी फंडिंग यूरोपियन यूनियन कर रही है। गर्मी की छुट्टियों में घर आने से अच्छा उन्होंने इस प्रोजेक्ट में काम करने की ठानी। इसमें वे एकमात्र छात्र थे जो स्कॉलरशिप के जरिए पहुंचे थे। साद इतिहास रचने के 12 घंटे पहले उनकी पहली सैटेलाइट लांचिंग फेल हो गई थी। इसके बाद फिर काम कर 12 घंटे बाद ही इसकी सफल लांचिंग की।

साद के मुताबिक यह मिनी सुपर कम्प्यूटर सेल्फ हीलिंग टेक्नालॉजी के तहत काम करता है। मतलब की यदि कम्प्यूटर में कुछ खराबी आ जाए तो इसे खुद ब खुद ही ठीक कर लेता है। इसे किसी के द्वारा ठीक करने की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरी तरह से ऑटोमेटिक है।

स्कूलों में शिक्षा के लिए हो उपयोग

साद मानते हैं कि आज का जमाना कम्प्यूटर का है। स्कूली स्तरों से ही बच्चों को सुपर कम्प्यूटर की जानकारी मिलनी चाहिए। ताकि वे भी अगले कलाम बन सके। इसलिए यह मिनी सुपर कम्प्यूटर तैयार किया गया है ताकि स्कूलों और कॉलेजों में भी यह पहुंच सके और डिजीटल इंडिया का सपना साकार हो सके।