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National Unity Day 2022: सरदार वल्लभ भाई पटेल का छत्तीसगढ़ से रहा है खास नाता, जानें लौह पुरुष बनने तक का रोचक सफर

National Unity Day 2022: लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्तूबर को मनाई जा रही है. सरदार वल्लभ भाई ने 562 रियासतों का विलय कर भारत को एक राष्ट्र बनाया था. यही कारण है कि वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day 2022) मनाया जाता है.

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Sardar Patel Jayanti 2022: सरदार वल्लभ भाई पटेल का छत्तीसगढ़ से रहा है खास नाता, जानें लौह पुरुष बनने तक का रोचक सफर

Sardar Patel Jayanti 2022: सरदार वल्लभ भाई पटेल का छत्तीसगढ़ से रहा है खास नाता, जानें लौह पुरुष बनने तक का रोचक सफर

National Unity Day 2022: स्वतंत्रता सेनानी व लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की आज 147वीं जयंती मनाई जा रही है. सरदार पटेल को आजाद भारत की एकता का सूत्रधार कहा जाता है. लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा जिले में हुआ था. सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर साल 2014 से 31 अक्टूबर को ‘नेशनल यूनिटी डे’ या ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. सरदार पटेल ने आजादी के बाद देश की एकता व 500 से ज्यादा देसी रियासतों का विलय करा कर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी.

सरदार पटेल (Sardar Patel Jayanti 2022) नवम्बर 1917 में पहली बार गाँधी जी से सीधे संपर्क में आये, 1918 में अहमदाबाद जिले में अकाल राहत का बहुत व्यवस्थित ढंग से प्रबंधन किया. 1920 के असहयोग आन्दोलन में सरदार पटेल ने स्वदेशी खादी, धोती, कुर्ता और चप्पल अपनाये तथा विदेशी कपड़ों की होली जलाई. महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया.

सरदार वल्लभ भाई पटेल को क्यों कहा जाता है लौह पुरुष
आजादी के समय भारत में लगभग 562 रियासत थी. जबकि ये राज्य कानूनी रूप से ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे पूरी तरह से ब्रिटिश क्राउन के अधीन थे. छोटे बड़े राजाओं, नवाबों को भारत सरकार के अधीन करते हुए रजवाड़े खत्म करना कोई आसान काम नहीं था लेकिन बिना किसी जंग के सरदार पटेल ने 562 रियासतों का भारत संघ में विलय कराया. 15 अगस्त, 1947 तक रियासतों के विलय की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी लेकिन कुछ रियासतों ने भारत के साथ शामिल होने से मना कर दिया. लेकिन समय के साथ सभी रियासतों का भारत में विलय हो गया. उनके द्वारा किए गए साहसिक कार्यों की वजह से ही उन्हें लौह पुरुष और सरदार जैसे विशेषणों से नवाजा गया.

सरदार पटेल दो बार छत्तीसगढ़ आए
रायपुर में वीर नारायण सिंह की शहादत से उठी आजादी की चिंगारी छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में फैल गई. इस शहादत के बाद 1920 से जब आजादी का आंदोलन छत्तीसगढ़ में फैलने लगा, तब महात्मा गांधी से लेकर पं. जवाहरलाल नेहरू, डा. राजेन्द्र प्रसाद, मदनमोहन मालवीय, जमनालाल बजाज जैसी हस्तियों के साथ सरदार वल्लभभाई पटेल रायपुर आये थे और यह छत्तीसगढ़ की उनकी पहली यात्रा थी. लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने नवंबर 1936 में रायपुर आकर स्वतंत्रता संग्राम को काफी ताकत दी थी. सरदार पटेल पं. रविशंकर शुक्ल के बूढ़ापारा स्थित निवास पर ठहरे थे, जो आजादी आंदोलन का केंद्र था.