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Save Vultures: कभी करोड़ों में थी गिद्धों की जनसंख्या, अब देश में बची हैं केवल नौ प्रजातियां

Save Vultures: गिद्ध अब शहरों में दिखाई नहीं पड़ते, क्योंकि शहर में इनके लिए भोजन उपलब्ध नहीं है। ऊंचे और घने पेड़ नहीं हैं। यही वजह है कि इन्होंने शहरों से कोसों दूर वन क्षेत्रों में अपना डेरा बना लिया है।

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रायपुर. गिद्ध अब शहरों में दिखाई नहीं (Save Vultures) पड़ते, क्योंकि शहर में इनके लिए भोजन उपलब्ध नहीं है। ऊंचे और घने पेड़ नहीं हैं। यही वजह है कि इन्होंने शहरों से कोसों दूर वन क्षेत्रों में अपना डेरा बना लिया है। यह तो एक पक्ष है, दूसरा पक्ष यह है कि गिद्धों की प्रजातियां संकट में है। आंकड़ों के मुताबिक एक समय देश में आठ करोड़ गिद्ध होने का अनुमान था, आज संख्या लाख में सिमटकर रह गई है। देश में गिद्धों की नौ प्रजातियां बची हैं, इनमें से पांच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में ही पाई जाती है।

गिद्धों प्रजातियों पर मंडरा रहे संकट पर, अब जाकर सरकार की नींद टूटी है। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने इनके संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार कर मंत्रिपरिषद से अनुमोदन मांगा है। नवंबर 2019 में हुई वन्यजीव संरक्षण मंडल की बैठक में यह प्रस्ताव रखा तो गया था, मगर इसे मंजूरी का इंतजार है। पक्षीविदों के मुताबिक गिद्धों की प्रजातियों पर संकट 2003 से शुरू हो गया था।

यह वह दौर था जब जानवरों को दर्द निवारक दवा डायक्लोफेनिक दी जा रही थी। जानवरों की मौत के बाद गिद्ध जब इन्हें अपना भोजन बनाते थे, तो यह दवा मांस के साथ गिद्धों के शरीर में पहुंच जाती थी। जो किडनी फेल कर देती थी। इस दवा को 2006 में प्रतिबंधित कर दिया गया। मगर, उसके बाद गिद्धों की प्रजातियां पनप नहीं सकीं। अब राज्य वन विभाग इन्हें बचाने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पक्षी विदों की मदद लेगा।

सिर्फ इन जगहों पर देखे गए हैं गिद्ध
अचानकमार टाइगर रिजर्व, गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान, इंद्रावती टाइगर रिजर्व और मैनपाट में गिद्ध पाए जाते हैं। इन क्षेत्रों में कुछ पक्षीविद इनके संरक्षण के लिए काम तो कर ही रहे हैं, साथ ही साथ गिद्धों को शिकारियों से बचा भी रहे हैं। वन विभाग भी संरक्षण कुछ हद तक अपनी भूमिका निभा रहा है। मगर, योजनावद्ध काम नहीं हो रहा।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हैं गिद्ध सुरक्षित
उत्तर छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों में गिद्ध विलुप्त हो चुके हैं। मगर मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में गिद्ध हैं। वह इसलिए क्योंकि यहां सघन वन क्षेत्र हैं, तराई के इलाके हैं। जहां इन्हें अनुकूल वातावरण मिल रहा है। नक्सल प्रभावित क्षत्रों में भी ये सुरक्षित माने जा रहे हैं।

वन विभाग वाइल्ड लाइफ पीपीसीएफ अतुल शुक्ला ने बताया, जैसे ही शासन से अनुमति मिलेगी, गिद्धों के संरक्षण की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। वन विभाग की तरफ से पूरी तैयारी है, हमें सिर्फ अनुमति का इंतजार है।

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