
जगदलपुर . दशहरा पर्व का महत्वपूर्ण विधान जोगी बिठाई की रस्म सोमवार शाम सिरहासार भवन में पूरी की गई। 600 वर्षों से चली आ रही परम्परा के अनुसार आमाबाल गांव के दौलत नाग को विधि-विधान से मावली देवी की पूजा-अर्चना के बाद सिरहासार भवन पहुंचाया गया। इसके बाद दौलत राम नाग बाद 9 दिनों के तप के लिए बनाए गए चार फीट के गड्ढे में बैठे। जोगी बिठाई की रस्म के अवसर पर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज, जगदलपुर राजपरिवार के सदस्य, कलेक्टर चंदन कुमार सहित बस्तर दशहरा समिति के सदस्य, मांझी, चालकी, मेम्बरीन आदि उपस्थित थे।
परंपरा अनुसार बस्तर जनपद के ग्राम बड़े आमाबाल के जोगी परिवार के वशंज जोगी के रूप में नौ दिनों तक बैठते हैं। सोमवार शाम सिरासार भवन में मांझी-चालकी व पुजारी की मौजूदगी में जोगी को नए वस्त्र पहनाए गए। तदुपरांत उसे गाजे-बाजे के साथ कपड़ों के पर्दे की आड़ में सिरासार के पास स्थित मावली माता मंदिर ले जाया गया। मावली मंदिर में पुजारी द्वारा दीप प्रज्जवलन किया गया। देवी की पूजा-अर्चना उपरांत वहां रखे तलवार की पूजा की गई। इसके बाद उक्त तलवार लेकर जोगी वापस सिरासार भवन में पहुंचे।
पुजारी के प्रार्थना उपरांत जोगी नौ दिनों तक साधना का संकल्प लेकर गड़ढे में बैठे। साधना काल में जोगी की सेवा-सुषुश्रा के लिए आमाबाल से ग्रामीण आए हुए हैं। मान्यता है कि जोगी के तप से देवी प्रसन्न होती हैं । उल्लेखनीय है कि नवरात्र की शुरुआत के साथ ही मां दन्तेश्वरी के प्रथम पुजारी के रूप में जोगी 9 दिनों तक एक ही जगह बैठकर कठिन व्रत रखते हैं।
जोगी बिठाई से पूर्व तर्पण विधान में हुए शामिल
जो गी बिठाई की रस्म को पूरा करने से पहले दौलत ने पिता और परिवार के लोगों के साथ ही अपने पूर्वजों के तर्पण विधान में शामिल हुआ। जहां पर उसने पूजा विधान से पूजा पाठ किया। दौलत के पिता ने बताया कि हर साल यह विधान किया जाता है। इस साल इस विधान में उनका बेटा और अन्य लोग शामिल हुए। तर्पण कार्यक्रम एक दिन पहले शनिवार की देर शाम को नाग परिवार ने पूरा किया। पीढ़ी दर पीढ़ी नौ दिन निराहार रहकर साधना करता आ रहा है। प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिवस माता मावली की आराधना कर सिरासार में गड्ढे में साधना पर बैठता है। इसके पूर्व यहां परंपरानुसार एक बकरा और सात मांगुर मछली की बलि दी जाती है।
दौलत के पिता भगत 6 वर्षों तक बने जोगी
दौलत नाग पहली बार सालों से चली आ रही परंपरा का पालन करते हुए इस साल जोगी बिठाई की रस्म को पूरा करेंगे। इससे पहले उनके पिता भगत जोगी इस विधान को 6 साल तक पूरा करते आए हैं। दौलत के पिता भगत ने कहा कि इस विधान को पूरा करने के लिए उसके बेटे ने अपनी सहमति दी थी। जिसके बाद उसे इस पूजा के लिए तैयार कर जोगी बिठाई की रस्म को पूर्ण किया गया। इधर जोगी के दर्शन करने लोगों का तांता लगा रहा।
Published on:
27 Sept 2022 02:53 pm
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