
रायपुर. छत्तीसगढ़ के स्पंज आयरन उद्योगों को हर साल 12 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत है, लेकिन वर्तमान हालात में उद्योगों को सिर्फ 2.50 मिलियन टन ही रॉ मटेरियल्स की उपलब्धता हो रही है। इसकी वजह से करोड़ों की लागत से बनी फैक्ट्रियों में बीते 5-6 वर्षों से क्षमता के मुताबिक उत्पादन ही नहीं हो रहा हैं, जिसका विपरीत असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।
इसके अलावा आम लोगों को वर्तमान कीमत से सस्ता स्टील उपलब्ध होने की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है। छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन मैन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन ने नेशनल मिनरल्स डवलपमेंट कार्पोरेशन (एमएनडीसी) से हर साल कम से कम 5 मिलियन टन आयरन ओर उपलब्ध कराने की मांग की है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से भी बहुप्रतीक्षित मांग पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया है।
प्रदेश में 90 स्पंज आयरन फैक्ट्रियां हैं, जिसमें रायपुर, दुर्ग, रायगढ़ और बिलासपुर में सबसे ज्यादा उद्योग संचालित हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल नचरानी ने बताया कि स्पंज आयरन उद्योगों को मिनी स्टील प्लांट के लिए स्पंज आयरन बनाने के लिए आयरन ओर की जरूरत होती है, लेकिन सालाना 30 मिलियन टन आयरन ओर बस्तर क्षेत्र के खदानों से निकालने के बाद भी एनएमडीसी से स्थानीय उद्योगों को कभी भी मांगों के बराबर रॉ-मटेरियल्स नहीं मिल पाया। इसकी वजह से उद्योगपति चाह कर भी क्षमता के मुताबिक उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।
देशभर में आयरन ओर सप्लाई करने के बाद स्थानीय उद्योगों को ओडि़शा पर निर्भर रहना पड़ता है। हमारी मांग है कि एनएमडीसी से रॉ मटेरियल्स के लिए स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता सूची में रखा जाए, वहीं 15 फीसदी रियायती दरों पर आयरन ओर उपलब्ध हो। हर साल कम से कम 5 मिलियन टन की उपलब्धता हो। एसोसिएशन ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं। बीते दिनों मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान आश्वासन मिला है कि स्थानीय उद्योगों के हित में निर्णय लिए जाएंगे।
तो 4000 रुपए टन सस्ता हो जाएगा स्टील
उद्योगपतियों का मानना है कि स्पंज आयरन उद्योगों को यदि मांगों के मुताबिक रॉ मटेरियल्स की सप्लाई हो तो प्रदेश में प्रति टन स्टील में आम लोगों को 4000 रुपए तक सस्ता मिलेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि कोविड-19 के दौर में महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना जैसे राज्यों में जहां वर्तमान में उद्योग 10 से लेकर 40 फीसदी पर सिमटा हुआ है, वहीं, छत्तीसगढ़ में 60 फीसदी उत्पादन शुरू हो रहा है। ऐसे में स्थानीय उद्योगों को डिमांड आ रही है। उद्योगों के लिए जरूरी उत्पादों के लिए यदि इस समय गंभीरता पूर्वक विचार किया जाए तो ना सिर्फ प्रदेश के उद्योगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि खरीदी-बिक्री से राज्य सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
ओडि़शा के निजी खदानों से लेना मजबूरी
उद्योगपतियों ने बताया कि एनएमडीसी से पर्याप्त मात्रा में जरूरी आयरन ओर नहीं मिलने की वजह से उद्योगपतियों को ओडि़शा के निजी खदानों से मजबूरी में रॉ मटेरियल्स खरीदना पड़ता है। एनएमडीसी से वर्तमान में 4000 रुपए प्रति टन की कीमत में आयरन ओर दिया जा रहा है। इसमें 15 फीसदी की राहत दी जानी चाहिए।
पहली बार लीज पॉलिसी में प्राथमिकता
उद्योगपतियों की मांग पर राज्य सरकार ने पहली बार एनएमडीसी के लीज पॉलिसी में स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता सूची में रखने के लिए नियम-शर्त लागू करने का विचार कर रही है। स्थानीय उद्योगों के लिए रॉ-मटेरियल्स की समस्या पर बीते दिनों प्रदेश के उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात करते हुए समस्याओं से अवगत कराया। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि एनएमडीसी के लीज पॉलिसी में जरूरी फेरबदल करते हुए स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता सूची में रखने के लिए शर्त रखी जाएगी। इसका फायदा स्टील सेक्टर के उद्योगों को मिलेगा।
Published on:
11 Jun 2020 05:49 pm
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