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जंगल सफारी व कानन पेंडारी में अत्याधुनिक अस्पताल

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वन विभाग की बैठक में फैसला

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जंगल सफारी व कानन पेंडारी में अत्याधुनिक अस्पताल

जंगल सफारी व कानन पेंडारी में अत्याधुनिक अस्पताल

रायपुर .वन्य प्राणियों के उपचार के लिए रायपुर के जंगल सफारी और बिलासपुर के कानन पेंडारी स्थित पशु चिकित्सालय का आधुनिकीकरण किया जाएगा। चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए पशु चिकित्सा विभाग में कार्यरत चिकित्सकों को वन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर लिए जाएंगे। साथ ही सभी 20 वन मण्डलों में उनकी तैनाती होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में बुधवार को सीएम हाउस स्थित निवास कार्यालय में आयोजित वन विभाग की बैठक में यह निर्णय लिए गए। उन्होंने हाथियों सहित अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण और निगरानी के लिए सभी प्रभावित वन मण्डलों में 10-10 लोगों को चयन कर टीम बनाने के निर्देश दिए। इस दौरान वन क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली विद्युत लाइन पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए हाथी प्रभावित वन एवं राजस्व क्षेत्रों में वन्यप्राणियों को बिजली के करंट से बचाने के लिए खुले हुए तारों को ऊर्जा और वन विभाग के द्वारा केबल लगाने के संबंध में भी विचार किया गया। बैठक के दौरान प्रमुख रूप से वन मंत्री मोहम्मद अकबर, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, सीएम के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू एवं सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिगुआ, पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अतुल शुक्ला, एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अरुण पाण्डेय, कैम्पा के सीईओ वी श्रीनिवास राव और सीएम सचिवालय में उप सचिव सौम्या चौरसिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

टीपी पास नहीं लगेगा
छत्तीसगढ़ में अब राष्ट्रीकृत वनोपजों को छोड़कर अन्य लघु वनोपजों के लिए परिवहन अनुज्ञा पत्र (टीपी पास) नहीं लेना पड़ेगा। मुख्यमंत्री द्वारा इसकी अनिवार्यता समाप्त करने से लघु वनोपजों को विक्रय के लिए लघु वनोपज एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में सुविधा होगी। साथ ही कारोबारियों और संग्रहणकर्ताओं को इसका लाभ मिलेगा। बता दें कि टीपी पास की अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए गुरूवार को वन विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है।

मोबाइल बेस्ड अलर्ट सिस्टम का विस्तार

महासमुंद वन मंडल मण्डल में मानव-हाथी द्वंद में नियंत्रण के लिए संचालित मोबाइल बेस्ड एलर्ट सिस्टम का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर इसे धरमजयगढ़ और सूरजपुर वन मंडल के 10-10 गांवों में लागू करने का निर्णय लिया गया। साथ ही मैदानी अमलों पर नियंत्रण के लिए वन विभाग के द्वारा मोबाइल एप तैयार करने पर बैठक में चर्चा की गई। बताया जाता है कि इस एप के माध्यम से फॉरेस्ट गार्ड से लेकर सभी अधिकारियों की मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे वन प्रबंधन और वन्य प्राणियों के संरक्षण में तत्काल जरूरी कदम उठाए जा सके। बता दें कि राज्य में पिछले 10 वर्षों के दौरान हाथियों सहित वन्य प्राणियों की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। इस समय हाथियों की संख्या 225 से बढ़कर आज 290 तक हो गई है।