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प्रसंगवश: हादसा- ट्रैफिक पुलिस, अभिभावक और नाबालिग वाहन चालक

रायपुर में पुलिस के तेज रफ्तार वाहन ने बुझा दिया एक घर का चिराग...

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Road Accident

राजधानी रायपुर में चार दिन पहले सीएम हाउस के पास हुए एक हृदयविदारक हादसे में तेज रफ्तार पुलिस क्रेन ने ईवी से स्कूल जा रहे भाई-बहन को टक्कर मार दी। जिसमें 14 वर्षीय लड़के की मौके पर ही मौत हो गई और उसकी 10 वर्षीय बहन गंभीर रूप से घायल हो गई थी।

इस हादसे के बाद सोशल मीडिया में नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने के लिए नहीं देने को लेकर तरह-तरह की टीका-टिप्पणियां हुई और अभी भी लोग लगातार विचार व्यक्त कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि छोटे बच्चों को चलाने के लिए वाहन नहीं देना चाहिए, क्योंकि 18 वर्ष से कम उम्र में सरकार भी वाहन चलाने का परमानेंट लाइसेंस नहीं देती है। बात भी सही है कि जब नाबालिगों के वाहन चलाने पर रोक है तो उन्हें वाहन देता कौन है..? हम ही अपने बच्चों को कम उम्र में वाहन चलाने को देते हैं... हम खुश भी होते हैं कि इतनी कम उम्र में हमारे बच्चे मोपेड-बाइक-स्कूटर-कार चला लेते हैं। जबकि परिवहन विभाग के नए नियम-कानून के हिसाब से ऐसे मामलों में माता-पिता को सजा का प्रावधान है।

रायपुर की इस घटना से दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पुणे में नाबालिग कार चालक के चर्चित मामले में बड़ी तल्ख और गंभीर टिप्पणियां की थी। हालांकि यह मामला बड़े ही हाईप्रोफाइल माने जाने वाले लोगों से जुड़ा था। इसी दौरान एक आंकड़ा सामने आया था कि 2023-24 के दौरान देश में नाबालिग वाहन चालकों के द्वारा 11,890 हादसे हुए, जिनमें 504 हादसे छत्तीसगढ़ के भी शामिल हैं।

और, अब बात ट्रैफिक-पुलिस विभाग की। ट्रैफिक विभाग दूसरों को यातायात नियमों का पालन नहीं करने और उनके उल्लंघन करने पर सजा देता है, उसी विभाग का वाहन यानी क्रेन वीवीआईपी इलाके में भी फर्राटा भर रही थी। और तो और, हादसे के बाद घायल बच्चों को अस्पताल ले जाने की बजाय क्रेन चालक वहां से फरार हो गया। ट्रैफिक-पुलिस विभाग को पहले खुद को जिम्मेदार बनने की जरूरत है। -अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com