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छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े विधानसभा में कम, लोकसभा में ज्यादा

प्रदेश में 3 साल में 2391 किसानों ने लगाया मौत को गले  

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farmer suicide in chhattisgarh

रायपुर . छत्तीसगढ़ में किसानों और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या के मामलों में राज्य और केंद्र सरकार के आंकड़ों में भारी अंतर हैं। पिछले वर्ष 21 दिसंबर को राज्य के गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ने जो आंकड़े विधानसभा में दिए उसमे कहा गया था कि राज्य में वर्ष 2015 से 30 अक्तूबर 2017 तक कुल 1344 किसानों ने आत्महत्या की थी। उसी दिन विधानसभा में रखे गए प्रपत्र में 2014 से अक्टूबर 2017 तक राज्य में कुल किसानों की मौत का आंकड़ा 1772 बताया गया लेकिन पिछले महीने केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने जो आंकड़े लोकसभा में रखे हैं उनको देखें तो पता चलता है कि कि 2014-से 2016 तक छत्तीसगढ़ में 2391 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की है।

आंकड़ों में इस अंतर के पीछे का रहस्य दरअसल किसानों और कृषक मजदूरों को अलग अलग देखने से भी जुडा हुआ है , किसान नेता महेशानंद कहते हैं कि राज्य सरकार किसानों और खेतिहर मजदूरों को अलग करके देखती है जबकि केंद्र सरकार के आंकड़े में इनको एक साथ रखा जाता है , गौरतलब है कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद से एकतरफ जहाँ किसानों की मौत के मामलों में लगभग 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई है वहीँ खेतिहर मजदूरों के आत्महत्या के मामलों में कमी न के बराबर है । 213 से 2016 के बीच किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या के कुल 2391 मामले सामने आये हैं जिनमे से 509 खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की है ।यहाँ यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि छत्तीसगढ़ में खेतिहर मजदूरों की संख्या राज्य निर्माण के बाद से अब तक तकऱीबन दस फीसदी बढ़ चुकी है।

एक यथार्थ यह भी रहा है कि राज्य में खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या के ज्यादातर मामले बेपर्दा रहे है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों में छत्तीसगढ़ में 2015 के दौरान कुल 7008 आत्महत्याओं की बात कही गई है इनमे से 845 किसानों या खेतिहर मजदूरों की संख्या है लेकिन आत्महत्या के 897 मामलों की वजह पुलिस को भी नहीं मालूम वहीँ 3346 मामले ऐसे हैं जिनकी वजह का उल्लेख नहीं हुआ है या फिर अन्य वजहों की सूची में डाल दिया गया है । आत्महत्या के जिन मामलों की वजह नहीं पता है उनको लेकर संदेह निश्चित तौर पर पैदा होता है कि जिन लोगों की आत्महत्या की वजह नहीं पता वो कौन लोग थे और उनके मरने की वजह क्या थी?





























वर्ष किसान कृषि मजदूर कुल
2014443312755
2015854100954
201658597682

3-अकेले 2009 में आत्महत्या के 1802 मामले दर्ज किये गए 2011 में यह संख्या शून्य हो गई,2012 में ये महज़ चार बताई गई,2013 में ये फिर से शून्य हो गई।

छत्तीसगढ़ गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ने बताया कि यह जांच का विषय है , हम इसकी विवेचना करेंगे कि यह अंतर क्यों आया है ।

छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव ने बताया कि सरकार गलत आंकड़े देती है , यह अलग अलग समय पर प्रमाणित होता रहा है ,जिस वक्त विधासनभा में आंकड़े बताये गए थे उस वक्त भी हमने कहा था कि आत्महत्या के मामले ज्यादा है।