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क्राइम पेट्रोल लिखते रहे, अब निर्देशन के क्षेत्र में कूदे भिलाई के गौरव, जानिए कैसे पाई ये सफलता

Patrika Interview : जब वे दसवीं कक्षा में थे तब अखबारों में आर्टिकल लिखा करते थे। इससे उनकी राइटिंग स्किल में निखार आता गया। म्यूजिक में इंट्रेस्ट था इसलिए खुद का रॉक बैंड बनाया

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रायपुर. Patrika Interview : ये कहानी है एक ऐसे युवा की, जो है इलेक्ट्रानिक इंजीनियर लेकिन जुनून कला के क्षेत्र में नाम कमाने का रहा। जब वे दसवीं कक्षा में थे तब अखबारों में आर्टिकल लिखा करते थे। इससे उनकी राइटिंग स्किल में निखार आता गया। म्यूजिक में इंट्रेस्ट था इसलिए खुद का रॉक बैंड बनाया। (CG Hindi news) देशभर का टूर किया। म्यूजिक ने उन्हें मुंबई तक खींच लिया। कुछ सीरियल और फिल्मों में म्यूजिक भी दिया। अब वे बन गए हैं छत्तीसगढ़ी फिल्मों के डायरेक्टर। नाम है गौरव रत्नाकर। पेश है बातचीत के महत्त्वपूर्ण अंश।

जैसा आउटपुट की उम्मीद करते हैं वैसा डिलीवर नहीं कर पाते

क्राइम पेट्रोल के कितने एपिसोड लिखे?

- दरअसल, क्राइम पेट्रोल की राइटिंग टीम वर्क की तरह होती है। लगभग 50 एपिसोड के लेखन में मैं शामिल रहा। स्कूल के समय से कॉलम लिखता था, जो कि इस सीरीज में काम आया।

छत्तीसगढ़ी फिल्मों का रुख कैसे किया?

- मैं मूलत: भिलाई का हूं। किसी इवेंट में मेरी मुलाकात होमन देशमुख से हुई। वे बॉलीवुड फिल्म डिस्को 82 बनाना चाहते थे। मेरे बारे में पहले सुन रखा था इसकी राइटिंग का काम मुझे दिया। उन्हें मेरा काम अच्छा लगा इसलिए छत्तीसगढ़ी फिल्म नोेनी के अनहोनी में निर्देशन का मौका दिया। यह फिल्म 24 नवंबर को रिलीज होने जा रही है। मैंने विंटर ऑफ 95 भी की है जिसे अवॉर्ड मिला है।

मुंबई और यहां के वर्क स्टाइल में क्या अंतर है?

- यहां इंडस्ट्री लेवल पर फिल्म नहीं बनती। मेकर्स पर्सनल लेवल पर फिल्म बनाने की कोशिश करते हैं। जैसा आउटपुट की उम्मीद करते हैं वैसा डिलीवर नहीं कर पाते। एक दौर में दिलीप कुमार जैसे कलाकार थे, बाद में शाहरूख आए। जैसे सचिन के बाद कोहली आए। छत्तीसगढ़ी सिनेमा शुरू से भोजपुरी इंडस्ट्री से प्रभावित रहा है। यहां से अनुराग बसु जैसे मेकर्स निकले लेकिन उन्होंने छत्तीसगढ़ी के लिए कोई काम नहीं किया।