
हर मोड़ पर आती गईं मुश्किलें, ये सामना करती गईं...
सरिता दुबे@रायपुर। CG News : गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक के मोगरा गांव की रहने वालीं 35 साल की खोमेश्वरी नायक कहती हैं कि औरतों को कभी हार नहीं माननी चाहिए। मुश्किलें आती हैं, लेकिन पीछे नहीं हटना चाहिए। कई सालों तक घरेलू हिंसा (Chhattisgarh news) का शिकार होने के बाद जब खोमेश्वरी ने विरोध किया तो तस्वीर ऐसे बदली कि जो समाज पहले उन्हें पति के साथ रहने पर विवश करता था, वही अपना आदर्श कहता है।
बेटियों को पढ़ाना है
खोमेश्वरी कहती हैं कि दोनों बेटियों को पढ़ाना है क्योंकि मैं खुद पढ़ी-लिखी नहीं थी। इस कारण मुझे इतनी तकलीफ उठानी पड़ी, लेकिन मेरी दोनों बेटियों को खूब पढ़ाऊंगी ताकि वे आत्मनिर्भर बनें। उनका मानना है कि पढ़ने से आप मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत होते हैं।
पति के खिलाफ निकलवाया वारंट
एक बार ऐसा भी हुआ कि खोमेश्वरी का केस वकील ठीक तरह से लड़ नहीं पा रहे थे, तब उन्होंने जज से वकील बदलने की मांग की। पति पेशी पर नहीं आ रहा था, तो खोमेश्वरी ने जज से उसका वारंट मांगा और जज ने उनके हाथों में उनके पति का पेशी वारंट दिया, फिर शहर की पुलिस की मदद से पति को कोर्ट तक लेकर आईं।
बेटी होने पर मिलता था उलाहना
खोमेश्वरी शादी के 2 माह बाद ही घरेलू हिंसा का शिकार होने लगी थीं। उनका पति रोज शारीरिक हिंसा करता था, यहां तक कि बीमार होने पर दवाई भी नहीं कराता था। दो बेटियों के होने पर ताने देता था। आठ साल तक वह पति की मार खाती रहीं। पंचायत और समाज भी पति के हित में बात करते थे। जब उनका सब्र का बांध टूटा तो वह गांव की लोक आस्था संस्थान की लता दीदी से मिलीं। उसके बाद खोमेश्वरी की हिम्मत बंधी। संस्थान की मदद से खोमेश्वरी ने कोर्ट में पति के खिलाफ लड़ाई लड़ी। दो साल बाद कोर्ट ने उनके पति को भरण-पोषण राशि देने के आदेश दिए।
Published on:
11 Dec 2022 05:05 pm
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