
अधर में छात्रों का भविष्य... सीटें खली फिर भी नहीं मिल रहा एडमिशन, अब सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन
रायपुर .प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की कई सीटें हर साल खाली रह जाती हैं। इनमें एडमिशन के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग हर साल इंडियन नर्सिंग काउंसिल से अभिमत मांगता है। इसके बाद दोबारा काउंसिलिंग शुरू होती है। लेकिन, इसमें इतनी लेटलतीफी होती है कि कई बच्चे दूसरे कोर्स में एडमिशन ले चुके होते हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग की इस लेटलतीफी के खिलाफ प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन लामबंद हो गया है।
मंगलवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के नेतृत्व में नवा रायपुर में डीएमई दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एसोसिएशन ने 8 मांगें रखी। गुप्ता ने बताया, बीएससी, एमएससी, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग काउंसिलिंग में चॉइस फीलिंग का विकल्प मॉपअप राउंड में देने के लिए काउंसिलिंग समिति को तुरंत आदेश जारी करना चाहिए। हर साल निर्धारित काउंसिलिंग के बाद नर्सिंग की सीटें खाली रह जाती हैं।
दोबारा काउंसिलिंग के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग इंडियन नर्सिंग काउंसिल से अभिमत मांगता है। इसमें काफी लेटलतीफी होती है। इसके चलते कई बच्चे एडमिशन नहीं ले पाते। ये प्रक्रिया जल्दी पूरी हो ताकि सीटें खाली न रहें। न्यू रजिस्टर्ड या पूर्व पंजीकृत छात्रों को रिक्त सीटों के आधार पर विकल्प फार्म भरने की सुविधा बीई, फार्मेसी, बीएड, एग्रीकल्चर की तर्ज पर दी जाए। छात्रों को किसी भी कॉलेज में जाकर स्क्रूटनी करवाने की सुविधा मिले, ताकि उनके समय और पैसों की बचत हो सके। इसी तरह कॉलेजों के निरीक्षण और स्टूडेंट्स के प्रायोगिक और क्लीनिकल प्रशिक्षण से जुड़ी जरूरी मांगें भी रखी गई हैं।
Published on:
13 Sept 2023 12:53 pm
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