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दृश्यों और बिम्बों के माध्यम से बड़े भाई साहब का सफल मंचन

मुंशी प्रेमचंद की कहानी'बड़े भाई साहब में यह दिखाया गया कि किस तरह हमारी शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को रट्टू तोता बनाया जा रहा है। इस शिक्षा व्यवस्था का प्रतिकार करता यह नाटक विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास एवं शिक्षा की जीवन में सार्थकता की बात को रेखांकित करता है।

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दृश्यों और बिम्बों के माध्यम से बड़े भाई साहब का सफल मंचन

दृश्यों और बिम्बों के माध्यम से बड़े भाई साहब का सफल मंचन

रायपुर. जनमंच में सोमवार को मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी ''बड़े भाई साहबÓÓ का मंचन किया गया। गुड़ी रायगढ़ संस्था द्वारा दी गई इस नाट्य प्रस्तुति में विशेष बात यह रही कि इस नाटक का मंचन रंगमंच की नवीनतम कहानी का रंगमंच शैली पर किया गया। इसमें कहानी का नाट्य रूपांतरण न कर उसकी जगह दृश्यों और विंबो के माध्यम से विस्तार किया गया।
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ''बड़े भाई साहबÓÓ में यह दिखाया गया कि किस तरह हमारी शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को रट्टू तोता बनाया जा रहा है। इस शिक्षा व्यवस्था का प्रतिकार करता यह नाटक विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास एवं शिक्षा की जीवन में सार्थकता की बात को रेखांकित करता है। नाटक की प्रस्तुति के पहले संस्था के कलाकार नवदीप ने बस स्टैंड और आर्मी ड्रीम पर माइम की प्रस्तुति दी। नाटक में अभिनेताओं के अभिनय ने दर्शकों को बांधे रखा।

कोलकाता में भी हुआ मंचन
''बड़े भाई साहबÓÓ नाटक का मंचन कोलकाता में समकालीन संस्कृति द्वारा आयोजित मोहनामुखी नाट्य महोत्सव में किया गया है। वहां भी इस नाटक को दर्शकों ने खूब सराहा। वहां संस्था द्वारा डॉ. योगेन्द्र चौबे का विशेष सम्मान किया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन भी किया गया जिसमें सर्ववाईवल ऑफ द थियेटर एण्ड आर्टिस्ट विषय पर विचार गोष्ठी भी रखी गई थी। इस गोष्ठी में रंजन गंगोपाध्याय, सुभाषिश बनर्जी के साथ ही डॉ. योगेन्द्र चौबे, रविन्द्र चौबे एवं विवेक तिवारी ने भी अपने विचार रखे।