
चैतन्य बघेल (photo source- Patrika)
Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत को बरकरार रखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर भविष्य में सुनवाई का रास्ता खुला रहेगा।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि फिलहाल हाईकोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने चैतन्य बघेल को मिली राहत को बरकरार रखा, लेकिन यह भी साफ किया कि मामले में उठे कानूनी मुद्दों पर अंतिम राय बाद की सुनवाई में तय होगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश में जांच एजेंसियों को लेकर की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को अनावश्यक माना और उन्हें रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।
चैतन्य बघेल को जनवरी में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद ED और राज्य सरकार ने उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जांच एजेंसियों का कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत रद्द की जानी चाहिए।
याचिकाओं में यह भी दावा किया गया कि जमानत मिलने के बाद इस मामले से जुड़े कुछ अहम गवाह सामने आने से हिचक रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद ही जमानत दी थी। साथ ही यह भी बताया गया कि मामले की जांच लंबे समय से जारी है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 जनवरी को कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों में चैतन्य बघेल को जमानत प्रदान की थी। इसी फैसले के खिलाफ ED और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के साथ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
यह मामला छत्तीसगढ़ के कथित 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अलग-अलग पहलुओं से कर रही हैं। ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य में शराब कारोबार से जुड़े सिस्टम का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से आर्थिक लाभ कमाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस दौरान सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा।
जांच एजेंसियों के अनुसार शुरुआती जांच में यह संकेत मिले कि शराब की खरीद, आपूर्ति और बिक्री से जुड़ी व्यवस्था पर एक संगठित नेटवर्क का प्रभाव था। आरोप है कि इस नेटवर्क में कुछ अधिकारी, कारोबारी और अन्य प्रभावशाली लोग शामिल थे। यह भी आरोप लगाया गया कि शराब नीति में कथित हेरफेर कर अवैध कमाई की गई और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
Updated on:
22 Jul 2026 03:37 pm
Published on:
22 Jul 2026 03:36 pm
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